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आईजीएनएफए गणतंत्र दिवस
जब संविधान की आत्मा, वर्दी की गरिमा और राष्ट्रसेवा का संकल्प एक मंच पर उतर आए—तो दृश्य सिर्फ औपचारिक नहीं, ऐतिहासिक बन जाता है। देहरादून स्थित इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) में 77वां गणतंत्र दिवस कुछ इसी भाव और वैभव के साथ मनाया गया।
देहरादून।
इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) देहरादून में 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के वातावरण में मनाया गया। इस विशेष अवसर पर अकादमी की प्रथम महिला निदेशक श्रीमती भारती ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड ग्राउंड राष्ट्रगान की गूंज से गूंज उठा।
ध्वजारोहण के पश्चात राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया, जिसने पूरे परिसर को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
निदेशक का संदेश: अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी याद

अपने प्रेरक संबोधन में श्रीमती भारती ने आईएफएस परिवीक्षार्थियों को राष्ट्रसेवा के प्रति आजीवन प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
“संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के साथ-साथ मूल कर्तव्यों के प्रति सजग रहना ही एक सच्चे लोकसेवक की पहचान है।”
उन्होंने यह भी जोर दिया कि वन सेवा अधिकारी के रूप में कार्य करते समय समाज के हर वर्ग, पर्यावरण संतुलन और भावी पीढ़ियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेना आज के समय की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
श्रेष्ठ सेवा के लिए सम्मान
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान अपने कर्तव्य निर्वहन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिकों को सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान न केवल उनके कार्य की सराहना था, बल्कि अन्य अधिकारियों और प्रशिक्षुओं के लिए प्रेरणा का संदेश भी।
देशभर से आए अधिकारी, परिवारजनों की भी सहभागिता
इस गरिमामय समारोह में—
- IGNFA, डीएफई एवं CASFoS देहरादून के अधिकारी एवं कर्मचारी
- IGNFA में एमसीटी प्रशिक्षण हेतु देशभर से आए आईएफएस अधिकारी
- प्रशिक्षणरत आईएफएस परिवीक्षार्थी
- CASFoS देहरादून में प्रशिक्षण ले रहे एसएफएस अधिकारी प्रशिक्षु
- तथा उनके परिवारजन
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह सहभागिता कार्यक्रम को केवल संस्थागत नहीं, बल्कि सामूहिक राष्ट्रीय उत्सव का रूप देती दिखी।
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IGNFA जैसे शीर्ष प्रशिक्षण संस्थानों में गणतंत्र दिवस का आयोजन केवल रस्म अदायगी नहीं होता, बल्कि यह संविधान, सेवा और संस्कार के त्रिवेणी संगम का प्रतीक है। प्रथम महिला निदेशक द्वारा दिया गया संदेश आने वाली पीढ़ी के वन अधिकारियों के लिए दीर्घकालिक मार्गदर्शन साबित होगा।