BREAKING: ‘घूसखोर पंडित’ पर लखनऊ पुलिस का शिकंजा! FIR दर्ज, डायरेक्टर नीरज पांडे का बयान आया सामने

मनोरंजन या मर्यादा का उल्लंघन? घूसखोर पंडित विवाद

लखनऊ कमिश्नरेट का साफ संदेश— “धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ अब नहीं चलेगा”

वेब सीरीज़ ‘घूसखोर पंडित’ (Ghooskhor Pandat) को लेकर जारी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है।

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जहां एक ओर लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में वेब सीरीज़ की टीम के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है, वहीं अब डायरेक्टर नीरज पांडे ने इस पूरे विवाद पर आधिकारिक बयान जारी किया है।


📍 लखनऊ | Eviralpress Exclusive

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने OTT इंडस्ट्री, सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत—तीनों में हलचल मचा दी है।
विवादित वेब सीरीज़ ‘घूसखोर पंडित’ (Ghooskhor Pandat) अब सीधे कानूनी कार्रवाई के घेरे में आ चुकी है।

लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में वेब सीरीज़ के डायरेक्टर और पूरी टीम के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।
आरोप बेहद गंभीर हैं—

👉 सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास
👉 धार्मिक और जातिगत भावनाओं को आहत करना


🚨 क्या है पूरा विवाद? |

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, वेब सीरीज़ का शीर्षक और कंटेंट एक विशेष समुदाय को नकारात्मक और अपमानजनक रूप में प्रस्तुत करता है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि—

“अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी समुदाय की धार्मिक या जातिगत पहचान को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है।”

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हजरतगंज पुलिस ने तत्काल FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


घूसखोर पंडित पर FIR दर्ज 🚓 लखनऊ पुलिस का सख्त रुख | Zero Tolerance Policy

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने इस पूरे मामले में कोई नरमी नहीं बरतने का संकेत दिया है।

पुलिस का आधिकारिक बयान:

“जो भी तत्व किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करेगा या शांति व्यवस्था से खिलवाड़ करेगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उत्तर प्रदेश में ‘Zero Tolerance Policy’ लागू है।”

यह बयान साफ करता है कि यह कार्रवाई सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि कठोर कानूनी परिणामों तक जा सकती है।

लखनऊ पुलिस की सख्ती के बाद मेकर्स का यू-टर्न, सभी प्रमोशनल मटेरियल हटाए गए

वेब सीरीज़ ‘घूसखोर पंडित’ (Ghooskhor Pandat) को लेकर जारी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है।
जहां एक ओर लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में वेब सीरीज़ की टीम के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है, वहीं अब डायरेक्टर नीरज पांडे ने इस पूरे विवाद पर आधिकारिक बयान जारी किया है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने Zero Tolerance Policy के तहत सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है।


🎬 डायरेक्टर नीरज पांडे का आधिकारिक बयान

विवाद गहराने के बीच घूसखोर पंडित के डायरेक्टर नीरज पांडे ने अपनी फिल्म को लेकर सार्वजनिक रूप से सफाई दी है।

उन्होंने कहा:

“हमारी फिल्म एक पूरी तरह से काल्पनिक (fictional) पुलिस ड्रामा है। ‘पंडत’ शब्द का उपयोग केवल एक काल्पनिक किरदार के लिए एक बोलचाल के नाम के तौर पर किया गया है।”

नीरज पांडे ने यह भी स्वीकार किया कि—

“हम समझते हैं कि फिल्म के टाइटल से कुछ दर्शकों की भावनाएं आहत हुई हैं, और हम उन भावनाओं का सम्मान करते हैं।”


घूसखोर पंडित विवाद के बाद डायरेक्टर नीरज पांडे का बयान आया

📉 प्रमोशनल मटेरियल हटाने का फैसला

डायरेक्टर ने आगे बताया कि विवाद को देखते हुए मेकर्स ने बड़ा फैसला लिया है—

“इन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, हमने फिलहाल फिल्म से जुड़े सभी प्रमोशनल मटेरियल को हटाने का निर्णय लिया है। हमारा मानना है कि फिल्म को पूरे संदर्भ में देखा और समझा जाना चाहिए, न कि केवल आंशिक झलकियों के आधार पर आंका जाना चाहिए।”

इस फैसले के बाद OTT प्लेटफॉर्म पर भी घूसखोर पंडित टीज़र और प्रचार सामग्री हटाई जा चुकी है


⚠️ घूसखोर पंडित विवाद  OTT इंडस्ट्री के लिए बड़ा संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक वेब सीरीज़ का नहीं है, बल्कि यह—

  • 🎥 OTT कंटेंट की सीमाएं तय करेगा
  • ⚖️ Creative Freedom बनाम Social Responsibility की नई बहस खोलेगा
  • 🚔 कानूनी जवाबदेही को और सख्त बनाएगा

यूपी पुलिस का रुख साफ है—
डिजिटल प्लेटफॉर्म भी कानून से ऊपर नहीं हैं।


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📢 सोशल मीडिया पर दो राय

FIR और नीरज पांडे के बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई है।

  • 🔹 एक वर्ग इसे संवेदनशीलता दिखाने वाला कदम बता रहा है
  • 🔹 दूसरा वर्ग सवाल उठा रहा है कि नाम रखने से पहले सतर्कता क्यों नहीं बरती गई?

हालांकि, अब मामला ट्रेंड से आगे बढ़कर कानून के दायरे में है।

यह विवाद साफ करता है कि—

👉 कंटेंट क्रिएशन में इरादा ही नहीं, प्रभाव भी मायने रखता है
👉 धार्मिक और जातिगत संदर्भों में नामकरण सबसे संवेदनशील पहलू होता है
👉 डिजिटल दौर में रिस्पॉन्सिबिलिटी अनिवार्य है

‘घूसखोर पंडित’ मामला आने वाले समय में OTT गाइडलाइंस और सेंसरशिप बहस को नई दिशा दे सकता है।

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