चम्बा | Eviralpress Special Report
हिमाचल प्रदेश की शांत और खूबसूरत वादियां जब कातिल बन जाएं, तो दर्द सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं रहता—वो पूरे देश के दिल में उतर जाता है।
चम्बा जिले से सामने आई यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि इंसान और जानवर के रिश्ते पर लिखा गया सबसे दर्दनाक अध्याय है।
जहां बर्फ ने दो मासूम जिंदगियों को निगल लिया, वहीं एक पिटबुल कुत्ते ने यह साबित कर दिया कि वफादारी किसी भाषा, तर्क या नियम की मोहताज नहीं होती।
❄️ बर्फीले सफर पर निकले दो भाई, वापस नहीं लौटे
यह दर्दनाक घटना 23 जनवरी की है।
चम्बा के रहने वाले विक्षित राणा (19) और उनके चचेरे भाई पीयूष कुमार (13) भरमाणी माता मंदिर की ओर ट्रैकिंग के लिए निकले थे।
दोनों भाई जोश और उत्साह से भरे थे। मोबाइल कैमरे में पहाड़ों की खूबसूरती कैद करने का सपना लिए वे आगे बढ़ते चले गए।
लेकिन पहाड़ों का मौसम कब करवट ले ले, कोई नहीं जानता।
अचानक चम्बा का मौसम बिगड़ा, तेज हवाएं चलीं और भयानक बर्फबारी शुरू हो गई।
कुछ ही घंटों में रास्ते गायब हो गए और दोनों भाई बर्फीले तूफान में फंस गए।
🚨 जब घर नहीं लौटे बच्चे, कांप उठा पूरा इलाका
शाम ढलने तक जब विक्षित और पीयूष घर नहीं पहुंचे, तो परिजनों की बेचैनी डर में बदल गई।
सूचना मिलते ही चम्बा पुलिस, प्रशासन, SDRF, सेना और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
लेकिन हालात आसान नहीं थे—
- लगातार बर्फबारी
- माइनस तापमान
- फिसलन भरे पहाड़ी रास्ते
ड्रोन और हेलीकॉप्टर तक कई बार मौसम की वजह से लौटने को मजबूर हुए।
🕯️ 3 दिन की तलाश के बाद मिला वो मंजर, जिसने सबको रुला दिया
26 जनवरी को रेस्क्यू टीम को आखिरकार सफलता मिली।
चम्बा में बर्फ की मोटी चादर हटाने पर दोनों भाइयों के शव बरामद हुए।
लेकिन जो दृश्य वहां मौजूद जवानों और अधिकारियों को भी तोड़ गया—
वो था पीयूष का पिटबुल कुत्ता।

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🐕 मौत के बाद भी डटा रहा ‘वफादार दोस्त’
कड़ाके की ठंड, माइनस तापमान और चार दिन बिना खाना-पानी…
फिर भी वह पिटबुल अपने मालिक पीयूष के शव के पास से एक कदम भी नहीं हटा।
रेस्क्यू टीम के मुताबिक—
- कुत्ता बेहद कमजोर हो चुका था
- गर्दन पर मामूली चोटों के निशान थे
- लेकिन आंखों में डर नहीं, सिर्फ अपने मालिक की रक्षा का भाव था
ऐसा लगा मानो वह कह रहा हो—
“जब तक सांस है, मैं यहीं रहूंगा।”
वह दृश्य देखकर कई जवानों की आंखें भी नम हो गईं।
🏥 एयरलिफ्ट कर बचाया गया पिटबुल
रेस्क्यू के बाद कुत्ते को चम्बा से सुरक्षित तरीके से एयरलिफ्ट कर परिवार तक पहुंचाया गया।
फिलहाल उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
लेकिन सवाल यही है—
क्या कोई इलाज उस दर्द का है, जो उसने अपने मालिक को खोकर झेला?
🌧️ पूरा हिमाचल गमगीन, सोशल मीडिया पर उमड़ा सैलाब
यह कहानी सामने आते ही सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
लोग लिख रहे हैं—
- “इंसानों को वफादारी सीखनी चाहिए।”
- “कुत्ते सिर्फ पेट नहीं, परिवार होते हैं।”
- “इस पिटबुल को सलाम।”
पूरे हिमाचल में शोक की लहर है।
यह घटना हमें एक कड़वा सच सिखाती है—
पहाड़ों में रोमांच से पहले सावधानी सबसे जरूरी है।
लेकिन साथ ही यह कहानी यह भी बताती है कि
भावनाएं सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं होतीं।
इस हादसे ने यह भी दिखा दिया कि पहाड़ों की खूबसूरती जितनी आकर्षक है, उतनी ही खतरनाक भी। बिना मौसम की पूरी जानकारी और सुरक्षा इंतजामों के ऐसे इलाकों में जाना जानलेवा साबित हो सकता है। चम्बा की यह त्रासदी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक चेतावनी है, ताकि रोमांच के साथ जिम्मेदारी और समझदारी को कभी नजरअंदाज न किया जाए।
कभी-कभी एक बेजुबान, पूरी मानवता से बड़ा सबक दे जाता है।