मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम से सामने आए कुछ वीडियो और तस्वीरों ने आस्था बनाम अनुशासन की बहस को तेज़ कर दिया है।
24 जनवरी को वायरल हुए इन फुटेज में भारतीय सेना के कुछ जवान पूरी वर्दी में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा में न सिर्फ मौजूद दिखे, बल्कि मंच पर सक्रिय भागीदारी करते हुए भी नज़र आए।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)यहीं से मामला भक्ति से निकलकर सेना के कोड ऑफ कंडक्ट तक पहुंच गया।
🎥 आख़िर हुआ क्या था?
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि:
- भारतीय सेना के जवान फुल यूनिफॉर्म में कथा स्थल पर मौजूद हैं
- मंच पर ‘सीता राम’ लिखा केक काटा जा रहा है
- जवान श्रद्धालुओं से बातचीत और उत्साहपूर्ण भागीदारी करते दिखते हैं
माहौल पूरी तरह भक्तिमय है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि
👉 क्या यह सब वर्दी में होना चाहिए था?
🙏 समर्थकों की दलील: भक्ति और संस्कृति
इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया।
समर्थकों का कहना है कि:
- ये देश के बहादुर सैनिक हैं
- उनकी निजी आस्था को रोका नहीं जाना चाहिए
- यह भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के प्रति प्रेम दर्शाता है
कई यूज़र्स ने इसे “देशभक्ति और धर्म का सुंदर संगम” बताया।
⚠️ क्यों खड़ा हुआ बड़ा विवाद?

मामला तब गंभीर हो गया जब रिटायर्ड कर्नल दानवीर सिंह ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।
उन्होंने इसे साफ शब्दों में “शर्मनाक” बताया और कहा कि:
- भारतीय सेना की वर्दी किसी एक धर्म या पंथ का प्रतिनिधित्व नहीं करती
- वर्दी में रहते हुए गैर-रेजिमेंटल धार्मिक आयोजनों में इस तरह की सक्रिय भागीदारी
👉 अनुशासन के खिलाफ हो सकती है - यह सेना की धर्मनिरपेक्ष आचार संहिता (Secular Code of Conduct) का उल्लंघन हो सकता है
कर्नल दानवीर सिंह ने इस पूरे मामले की तत्काल जांच की मांग की है।
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🪖 सेना का नियम क्या कहता है?
भारतीय सेना अपनी Sarva Dharma Sthal परंपरा के लिए जानी जाती है,
जहाँ रेजिमेंटल स्तर पर सभी धर्मों का समान सम्मान होता है।
लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार:
- वर्दी में निजी धार्मिक गुरुओं के सार्वजनिक कार्यक्रमों में
इस तरह की मंचीय भागीदारी - यूनिफॉर्म प्रोटोकॉल के दायरे में आती है
मुख्य सवाल यही है:
👉 क्या यह उपस्थिति आधिकारिक थी या पूरी तरह व्यक्तिगत?
🕵️♂️ ताज़ा अपडेट
25 जनवरी तक इस पूरे मामले पर
👉 भारतीय सेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि:
- क्या मामले की जांच होती है?
- या इसे निजी आस्था मानकर छोड़ दिया जाएगा?
आस्था या अनुशासन?
यह मामला एक बुनियादी सवाल छोड़ जाता है—
क्या वर्दी में सैनिक को अपनी निजी आस्था का सार्वजनिक प्रदर्शन करना चाहिए?
या फिर वर्दी का अनुशासन सर्वोपरि है?
देश की जनता बंटी हुई है।
अब फैसला सेना की प्रक्रिया और नियम तय करेंगे।
