देहरादून | Eviralpress Special Report
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)देश की राजनीति आज गहरे शोक में डूबी है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री श्री अजीत पवार के विमान दुर्घटना में निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश में सन्नाटा छा गया। सत्ता के गलियारों से लेकर आम जनता तक, हर कोई इस खबर से स्तब्ध है।
इस हृदयविदारक हादसे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
यह सिर्फ एक राजनीतिक खबर नहीं है, बल्कि यह उस नेतृत्व के अंत की खबर है, जिसने वर्षों तक समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए काम किया।
“अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के लिए हमेशा संवेदनशील रहे अजीत पवार” — सीएम धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने शोक संदेश में बेहद भावुक शब्दों में कहा कि—
“श्री अजीत पवार ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए सदैव करुणा, संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया। उनका निधन सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति है।”
सीएम धामी ने ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा कि इस विमान दुर्घटना में दिवंगत सभी पुण्यात्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान मिले और अजीत पवार के शोकाकुल परिजनों, सहयोगियों व समर्थकों को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्राप्त हो।
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उत्तराखंड कैबिनेट में छाया शोक, 2 मिनट का मौन
अजीत पवार की दर्दनाक घटना का असर उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में भी साफ दिखाई दिया।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक की शुरुआत दो मिनट के मौन के साथ की गई, जिसमें विमान हादसे में दिवंगत सभी आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
कैबिनेट सूत्रों के अनुसार, पूरा वातावरण गंभीर और भावुक था। मंत्रियों ने एक स्वर में कहा कि यह हादसा केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गहरी क्षति है।
अजीत पवार: राजनीति से आगे एक जननेता
अजीत पवार को सिर्फ एक शक्तिशाली राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक ground-connected leader के रूप में देखा जाता रहा है।
चाहे ग्रामीण विकास हो, किसानों से जुड़े मुद्दे हों या सामाजिक न्याय—उन्होंने हमेशा निर्णयों में संवेदनशीलता दिखाई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजीत पवार अचानक इस तरह चले जाना भारतीय राजनीति में एक ऐसा शून्य पैदा करेगा, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।
विमान दुर्घटना की खबर से देशभर में सदमा
जैसे ही अजीत पवार के विमान दुर्घटना की खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर शोक संदेशों की बाढ़ आ गई।
नेता, अधिकारी, सामाजिक संगठन और आम नागरिक—हर कोई अपने तरीके से श्रद्धांजलि अर्पित करता नजर आया।
हालांकि हादसे के तकनीकी कारणों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है, लेकिन फिलहाल पूरा देश शोक और संवेदना के भाव में डूबा हुआ है।
राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठी संवेदना
इस पूरे घटनाक्रम में एक बात साफ दिखी—राजनीति से ऊपर उठकर मानवीय संवेदना।
उत्तराखंड सरकार की ओर से व्यक्त किया गया शोक संदेश यह दर्शाता है कि लोकतंत्र की असली ताकत आपसी सम्मान और सहानुभूति में है।
सीएम धामी का यह बयान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अनुभवी नेतृत्व की संवेदनशील प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
देश ने खोया एक अनुभवी नेतृत्व
अजीत पवार का निधन एक ऐसे दौर में हुआ है जब देश को अनुभवी और संतुलित नेतृत्व की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है।
उनका जाना सिर्फ एक राजनीतिक नुकसान नहीं, बल्कि शासन और नीति-निर्माण की दुनिया के लिए भी एक बड़ा झटका है।
आज हर आंख नम है, हर दिल भारी है।
ऐसी घटनाएँ हमें याद दिलाती हैं कि सत्ता, पद और राजनीति से ऊपर मानव जीवन है।
अजीत पवार का जाना एक चेतावनी भी है—कि जीवन कितना अनिश्चित है।



