हरिद्वार, 10 सितंबर 2026: कुंभ 2027 को लेकर उत्तराखंड सरकार ने अब निर्माण कार्यों की गति, गुणवत्ता और समयसीमा पर निगरानी और सख्त कर दी है। मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने गुरुवार को हरिद्वार में रोड़ी-बेलवाला से लेकर रोशनाबाद, कनखल, दक्षद्वीप, बैरागी कैंप और सीसीआर टावर तक विभिन्न निर्माण स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर उन्होंने सड़क, पुल, घाट, फुटपाथ, प्रशासनिक भवन और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों की प्रगति और तकनीकी स्थिति की जानकारी ली। निरीक्षण के बाद हुई बैठक में उन्होंने साफ निर्देश दिए कि कुंभ से जुड़े निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरे हों और गुणवत्ता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए।
कुंभ मेला-2027 की तैयारियों के लिहाज से यह निरीक्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मेला क्षेत्र में एक साथ बड़ी संख्या में स्थायी और अस्थायी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। हाल में मेला प्रशासन ने भी बताया था कि कुंभ से जुड़े 126 कार्यों के लिए करीब 709 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है और वर्षाकाल समाप्त होने के बाद निर्माण कार्यों को और गति देने की तैयारी है।
मुख्य सचिव ने सड़क से लेकर घाट और पुल तक देखा काम
मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने अधिकारियों के साथ अरबेनिया वाहन में बैठकर एक निर्माण स्थल से दूसरे निर्माण स्थल तक पहुंचकर मौके पर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण का दायरा रोड़ी-बेलवाला से शुरू होकर रोशनाबाद, कनखल, दक्षद्वीप, बैरागी कैंप और फिर सीसीआर टावर तक रहा।
इस दौरान केवल निर्माण की भौतिक प्रगति ही नहीं देखी गई, बल्कि यह भी समझने की कोशिश की गई कि तैयार होने वाली परिसंपत्तियां कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं के लिए कितनी उपयोगी होंगी। सड़क, पुल, पैदल मार्ग, घाट, पेयजल, स्वास्थ्य, पार्किंग और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़कर देखने पर जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन परियोजनाओं की गति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, उन्हें चिन्हित कर उनकी बाधाओं को तत्काल दूर किया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने को कहा गया।
कुंभ की तैयारियों में सिर्फ निर्माण नहीं, उपयोगिता भी महत्वपूर्ण

कुंभ मेला केवल एक बड़े धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। हरिद्वार में इस दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यातायात, पैदल आवागमन, पार्किंग, स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वच्छता जैसी व्यवस्थाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
इसी वजह से मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के दौरान स्थानीय नागरिकों की सुविधा, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा मानकों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।
रोड़ी-बेलवाला और हरकी पैड़ी क्षेत्र में करोड़ों के काम
निरीक्षण के दौरान रोड़ी-बेलवाला क्षेत्र में उत्तराखंड निवेश एवं अवस्थापना विकास बोर्ड की प्रशासनिक मार्ग परियोजना और रोड़ी-बेलवाला तथा हरकी पैड़ी क्षेत्र की पुनर्विकास परियोजनाओं की समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के अनुरूप उच्चस्तरीय व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
एक महत्वपूर्ण निर्देश परियोजनाओं के भविष्य के रखरखाव को लेकर भी दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि परियोजनाओं से बनी परिसंपत्तियों और विकसित व्यवस्थाओं की पांच वर्ष की अनुबंध अवधि पूरी होने के बाद उनके स्थायी रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग या निकाय की होगी, यह व्यवस्था अभी से तय की जाए।
उन्होंने मेलाधिकारी को संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों के साथ इस संबंध में औपचारिक मसौदा तैयार कर शासन की स्वीकृति के लिए भेजने को कहा।
प्रशासनिक मार्ग निर्माण के लिए ₹4,325.14 लाख और हरकी पैड़ी पुनर्विकास कार्य के लिए ₹6,677.21 लाख की धनराशि स्वीकृत है।
घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष जोर

मुख्य सचिव ने हाथीपुल से अलकनंदा के बीच घाटों के पुनर्निर्माण और सुधार कार्यों का भी निरीक्षण किया।
उन्होंने घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मजबूत रेलिंग और चेन की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही पैदल आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन को सुगम बनाने पर जोर दिया गया।
कुंभ जैसे बड़े आयोजन में घाटों पर भीड़ का दबाव सबसे संवेदनशील व्यवस्थाओं में शामिल होता है। ऐसे में निर्माण के साथ-साथ यह देखना भी जरूरी है कि घाटों की संरचना और वहां की सुरक्षा व्यवस्था भारी भीड़ की स्थिति में कितनी प्रभावी रहेगी।
ऋषिकुल में सड़क और फुटपाथ का निरीक्षण
इसके बाद मुख्य सचिव ऋषिकुल क्षेत्र पहुंचे, जहां उन्होंने ओल्ड दिल्ली-नीतिपास मार्ग के नवीनीकरण कार्य का जायजा लिया।
उन्होंने यातायात और स्थानीय आवागमन को ध्यान में रखते हुए निर्माण के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं बनाए रखने के निर्देश दिए। सड़क किनारे विकसित किए जा रहे फुटपाथ और अन्य उपयुक्त स्थानों पर पौधरोपण कर हरियाली विकसित करने पर भी जोर दिया।
दूधाधारी चौक से ज्वालापुर क्षेत्र सहित लोक निर्माण विभाग के अधीन शहर की अन्य आंतरिक सड़कों के नवीनीकरण के लिए ₹2,164.49 लाख की धनराशि स्वीकृत है।
इस तरह सड़क सुधार को केवल यातायात की जरूरत से जोड़कर नहीं, बल्कि कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं के पैदल और वाहन आवागमन तथा शहर की समग्र सुविधा से जोड़कर देखा जा रहा है।
चौराहों पर पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता
मुख्य सचिव ने शिवमूर्ति चौक, शंकर आश्रम चौक और भगत सिंह चौक से विल्केश्वर तक चौराहों के सुधार तथा पैदल यात्रियों के लिए फुटपाथ निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया।
करीब ₹683.60 लाख की लागत वाली इस परियोजना में पैदल यात्रियों की सुविधा, सुरक्षित आवागमन और यातायात के सुचारु संचालन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
कुंभ के दौरान हरिद्वार की सड़कों पर वाहन और पैदल यात्रियों का दबाव सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ सकता है। ऐसे में चौराहों और प्रमुख मार्गों पर पैदल आवागमन के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराना भीड़ प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
रोशनाबाद में ड्रग वेयरहाउस और दक्षद्वीप पुल का निरीक्षण
रोशनाबाद में मुख्य सचिव ने ₹251.98 लाख की लागत से निर्माणाधीन ड्रग वेयरहाउस का निरीक्षण किया। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी इस परियोजना को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए।
इसके बाद दक्षद्वीप स्थित बैरागी क्षेत्र में निर्माणाधीन 60 मीटर स्पान पुल का निरीक्षण किया गया। इस परियोजना के लिए ₹1,246.09 लाख की धनराशि स्वीकृत है।
मुख्य सचिव ने पुल निर्माण की प्रगति और तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखते हुए काम समय पर पूरा करने को कहा।
इस क्षेत्र में पुल और संपर्क मार्ग कुंभ के दौरान आवागमन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इससे पहले भी मेला प्रशासन द्वारा बैरागी कैंप और दक्षद्वीप क्षेत्र में पुल, सड़क और पार्किंग से जुड़े कार्यों की निगरानी की जाती रही है।
सीसीआर-2 भवन को लेकर भी सख्त निर्देश
मुख्य सचिव ने सीसीआर-2 भवन का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कुंभ मेला शुरू होने से पहले भवन को तैयार करने के लिए निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
आवश्यकता पड़ने पर दिन-रात काम कराने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही भवन निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
कुंभ जैसे बड़े आयोजन में नियंत्रण और समन्वय से जुड़े भवनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए यहां केवल भवन को समय पर तैयार करना ही नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और उपयोगिता सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिकता है।
बैठक में निर्माण कार्यों की विभागवार समीक्षा
स्थलीय निरीक्षण के बाद मुख्य सचिव ने डाम कोठी में कुंभ मेला और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें विभागवार निर्माण कार्यों और अन्य तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
उन्होंने कार्यदायी संस्थाओं को पर्याप्त मानव संसाधन और मशीनरी उपलब्ध रखने के निर्देश दिए ताकि निर्माण कार्यों की गति प्रभावित न हो।
मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कागज पर प्रगति दिखाना पर्याप्त नहीं होगा। परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति को लगातार मौके पर जाकर परखना होगा और जहां समस्या है, वहां उसका समाधान समय रहते करना होगा।
गुणवत्ता जांच के लिए तीन संस्थाओं की निगरानी
कुंभ मेला-2027 के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच के लिए नियुक्त टीयूवी एसयूडी साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड, क्वालिटी ऑस्ट्रिया सेंट्रल एशिया प्राइवेट लिमिटेड और ब्यूरो वेरिटास (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के टीम लीडर्स से भी मुख्य सचिव ने गुणवत्ता जांच की प्रगति की जानकारी ली।
उन्होंने निर्देश दिए कि गुणवत्ता जांच लगातार और सख्ती से की जाए। यदि किसी निर्माण में कमी सामने आती है तो उसे तत्काल ठीक कराया जाए।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कुंभ के लिए तैयार होने वाली कई परियोजनाएं केवल मेले की अवधि के लिए नहीं, बल्कि उसके बाद भी शहर की स्थायी आधारभूत संरचना का हिस्सा बन सकती हैं।
हाल में मेला क्षेत्र में निर्माणाधीन विभिन्न पुलों की गुणवत्ता और प्रगति की भी अधिकारियों द्वारा जांच की गई थी और धीमी गति वाले कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए गए थे।
एनएच परियोजनाओं से प्रभावित पार्किंग और मार्गों पर भी नजर
बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के कारण प्रभावित होने वाले पार्किंग स्थलों और डायवर्जन मार्गों को लेकर भी जानकारी ली गई।
मुख्य सचिव ने वैकल्पिक मार्ग और पुलों की योजनाओं की समीक्षा की। साथ ही कुंभ के दौरान संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए प्रभावी भीड़ प्रबंधन योजना तैयार करने के निर्देश दिए।
कुंभ के दौरान भीड़ प्रबंधन सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौतियों में से एक रहेगा। इसलिए केवल स्थायी निर्माण पूरा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी तय करना होगा कि निर्माण के बाद श्रद्धालुओं और वाहनों का आवागमन किस तरह संचालित किया जाएगा।
709 करोड़ से ज्यादा के काम, अब रफ्तार बढ़ाने की तैयारी
कुंभ मेला प्रशासन ने सितंबर की शुरुआत में बताया था कि कुंभ से जुड़े 126 कार्यों के लिए करीब ₹709.23 करोड़ की स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें सड़क, घाट, पुल और अन्य अवस्थापना विकास से जुड़े काम शामिल हैं। मेला प्रशासन के अनुसार वर्षाकाल समाप्त होने के बाद निर्माण कार्यों में और तेजी लाने की तैयारी है और अधिकांश कार्यों को तय समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
ऐसे में मुख्य सचिव का यह स्थलीय निरीक्षण उस व्यापक निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा सकता है, जिसके तहत प्रशासन अब परियोजनाओं की जमीनी प्रगति को लगातार परख रहा है।
सरकारी निविदा अभिलेखों में भी कुंभ मेला-2027 के लिए पार्किंग, अखाड़ों और शिविर क्षेत्रों से जुड़े अस्थायी मार्ग तथा अन्य व्यवस्थाओं के काम सामने आ रहे हैं। इससे साफ है कि मेले की तैयारियां कई स्तरों पर एक साथ आगे बढ़ रही हैं।
पुलों का सुरक्षा ऑडिट, आईआईटी रुड़की से भी जांच का आग्रह
मेलाधिकारी सोनिका ने बैठक में मुख्य सचिव को बताया कि कुंभ क्षेत्र के पुलों का सुरक्षा ऑडिट संबंधित विभागों द्वारा कराया जा चुका है। साथ ही आईआईटी रुड़की से भी पुलों की जांच कराने का आग्रह किया गया है।
सीसीआर-2 भवन की गुणवत्ता जांच के लिए नियुक्त एजेंसी के अतिरिक्त केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान से भी गुणवत्ता जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन निर्माण की गति के साथ स्वतंत्र और तकनीकी गुणवत्ता जांच को भी महत्व दे रहा है।
असली चुनौती सिर्फ समय पर निर्माण नहीं
कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में अब सबसे बड़ी चुनौती केवल परियोजनाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर, सुरक्षित और उपयोगी तरीके से तैयार करना है।
एक तरफ सड़क और पुल जैसे बड़े निर्माण कार्य हैं तो दूसरी तरफ घाट, पैदल मार्ग, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं हैं। इनके बीच तालमेल जरूरी है। किसी एक परियोजना में देरी का असर दूसरी व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
यही वजह है कि मुख्य सचिव ने विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के बीच समन्वय पर विशेष जोर दिया है।
इसके अलावा स्थानीय लोगों की सुविधा भी महत्वपूर्ण है। कुंभ की तैयारियों के दौरान निर्माण गतिविधियों के कारण यातायात, आवाजाही और दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है। इसलिए प्रशासन को विकास कार्यों और स्थानीय सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
प्रशासन के सामने अब समयबद्धता की बड़ी परीक्षा
कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में अब निर्माण कार्य निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहे हैं। मेला प्रशासन पहले ही कह चुका है कि 15 सितंबर के बाद कार्यों में और तेजी आएगी तथा अधिकांश कार्य 15 अक्टूबर तक पूरे करने का लक्ष्य है।
ऐसे में अगले कुछ सप्ताह निर्माण परियोजनाओं की वास्तविक गति तय करने वाले होंगे।
मुख्य सचिव का संदेश स्पष्ट है—काम समय पर होना चाहिए, लेकिन जल्दबाजी में गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा।
यदि प्रशासन विभागों के बीच समन्वय, नियमित गुणवत्ता जांच और जमीनी निगरानी को इसी तरह जारी रखता है, तो कुंभ से पहले प्रमुख आधारभूत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की दिशा में गति बनी रह सकती है।
श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने पर जोर
मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने अधिकारियों से कहा कि कुंभ मेला-2027 में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचेंगे। इसलिए सभी विभागों को टीम भावना के साथ काम करते हुए तय लक्ष्य समय पर पूरा करना होगा।
उनका जोर केवल निर्माण पूरा करने पर नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित अनुभव देने पर रहा।
यानी कुंभ की तैयारियों का अंतिम लक्ष्य सिर्फ नई सड़क, पुल या भवन तैयार करना नहीं है। लक्ष्य यह है कि जब श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचें तो उन्हें आने-जाने, स्नान, ठहरने, स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं में कम से कम परेशानी हो।
कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में अब सरकार ने निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता पर अपना फोकस और बढ़ा दिया है। मुख्य सचिव का हरिद्वार में व्यापक स्थलीय निरीक्षण इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रोड़ी-बेलवाला, हरकी पैड़ी, ऋषिकुल, रोशनाबाद, दक्षद्वीप, बैरागी कैंप और सीसीआर-2 जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चल रहे कार्यों की मौके पर समीक्षा की गई। करोड़ों रुपये की परियोजनाओं के साथ-साथ इनके भविष्य के रखरखाव, गुणवत्ता जांच, यातायात, पार्किंग और भीड़ प्रबंधन जैसे विषयों पर भी निर्देश दिए गए।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले हफ्तों में निर्माण कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं और तय समयसीमा तक कितनी परियोजनाएं वास्तव में जमीन पर तैयार हो पाती हैं।
कुंभ 2027 के लिए सरकार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या निर्माण की रफ्तार और गुणवत्ता, दोनों को साथ लेकर चलने का लक्ष्य समय पर पूरा होगा?
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. कुंभ मेला-2027 की तैयारियों में मुख्य सचिव ने क्या देखा?
मुख्य सचिव आनंद वर्द्धन ने हरिद्वार में सड़क, पुल, घाट, फुटपाथ, प्रशासनिक भवन, पार्किंग और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया।
2. मुख्य सचिव ने अधिकारियों को क्या निर्देश दिए?
उन्होंने सभी निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा करने, गुणवत्ता से समझौता नहीं करने, धीमी परियोजनाओं में तेजी लाने और निर्माण संबंधी बाधाओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए।
3. कुंभ मेला-2027 के लिए कितने कार्यों को स्वीकृति मिली है?
मेला प्रशासन के अनुसार कुंभ से जुड़े 126 कार्यों के लिए करीब ₹709.23 करोड़ की स्वीकृति मिल चुकी है।
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