देहरादून: उत्तराखंड (चारधाम यात्रा) के प्रमुख तीर्थ स्थलों से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है। Badrinath Kedarnath Temple Committee (बीकेटीसी) की देहरादून स्थित शिविर कार्यालय में 10 मार्च को आयोजित बजट बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष Hemant Dwivedi ने की। इस बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 121.7 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया।
इसी दौरान एक अहम निर्णय लेते हुए समिति के अधीन आने वाले मंदिरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई।
यह फैसला चारधाम यात्रा से पहले लिया गया है, जिसके कारण राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
बड़ा धार्मिक फैसला? चारधाम में गैर-हिंदुओं की ‘NO ENTRY’ पर मंथन, पुरोहित समाज का खुला समर्थन
हर की पैड़ी विवाद के बाद तेज हुई थी मांग
इस निर्णय की पृष्ठभूमि इसी वर्ष जनवरी में सामने आए एक विवाद से जुड़ी है।
Har Ki Pauri क्षेत्र में स्थित Ganga Sabha Haridwar ने मांग की थी कि हर की पैड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए।
इसके बाद वहां कई स्थानों पर “अहिंदु प्रवेश निषेध” के बोर्ड लगाए गए थे। यह मामला काफी चर्चा में रहा और धीरे-धीरे चारधाम समेत अन्य मंदिरों में भी इसी तरह की मांग उठने लगी।
धार्मिक संगठनों का तर्क था कि तीर्थस्थलों की आध्यात्मिक पवित्रता और परंपराओं को बनाए रखने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।
चारधाम यात्रा के दौरान इन प्रमुख मंदिरों में लागू होगा प्रतिबंध
बीकेटीसी के अधीन आने वाले कई प्रमुख मंदिरों में इस प्रस्ताव के लागू होने की संभावना है। इनमें शामिल हैं:
- Badrinath Temple
- Kedarnath Temple
- त्रियुगीनारायण मंदिर
- नरसिंह मंदिर
- विश्वनाथ मंदिर
- ओंकारेश्वर मंदिर
- कालीमठ मंदिर
- मद्महेश्वर मंदिर
- तुंगनाथ मंदिर
- रुद्रनाथ मंदिर
- कल्पेश्वर मंदिर
- योगध्यान बदरी
- भविष्य बदरी
- आदि बदरी
- वृद्ध बदरी
- गौरीकुंड
- माता मूर्ति मंदिर
इनके अलावा समिति के अधीन आने वाले कुल 47 धार्मिक स्थलों में इस प्रस्ताव को लागू करने की बात कही गई है।
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया
इस फैसले के बाद कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आई है।
Asaduddin Owaisi ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के निर्णय संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं और यह समानता के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बन सकता है।
वहीं Arshad Madani ने भी चिंता जताई कि ऐसे प्रतिबंध समाज में विभाजन की भावना को बढ़ा सकते हैं।
कुछ मुस्लिम नेताओं ने किया समर्थन
हालांकि इस मुद्दे पर कुछ मुस्लिम नेताओं ने अलग राय भी रखी है।
Umer Ahmed Ilyasi ने इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि हर धर्म के अपने नियम और परंपराएं होती हैं और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था उसी आधार पर तय की जाती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह मक्का और मदीना में गैर-मुसलमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध है, उसी तरह अन्य धर्मों के पवित्र स्थलों के भी अपने नियम हो सकते हैं।
सरकार ने समिति पर छोड़ा फैसला
इस पूरे मामले पर उत्तराखंड सरकार पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुकी है।
राज्य के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े निर्णय वहां के प्रबंधन और संत समाज की सहमति से ही लिए जाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि तीर्थस्थलों का संचालन मंदिर समितियों, संत समाज और तीर्थ सभाओं के सहयोग से होता है, इसलिए ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय भी इन्हीं संस्थाओं के स्तर पर लिया जाता है।
चारधाम यात्रा से पहले क्यों अहम है यह फैसला
उत्तराखंड की प्रसिद्ध Char Dham Yatra हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।
चारधाम यात्रा में प्रमुख रूप से चार तीर्थ शामिल हैं:
- बदरीनाथ
- केदारनाथ
- गंगोत्री
- यमुनोत्री
चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले मंदिर प्रबंधन से जुड़े इस फैसले ने देशभर में चर्चा को तेज कर दिया है।
एक ओर इसे धार्मिक परंपराओं की सुरक्षा से जुड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके सामाजिक और संवैधानिक पहलुओं पर बहस जारी है।
बीकेटीसी द्वारा गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद चारधाम और अन्य मंदिरों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
जहां एक पक्ष इसे धार्मिक परंपराओं और आस्था की सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहा है, वहीं दूसरा पक्ष इसे संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस प्रस्ताव को किस रूप में लागू किया जाता है और इसका प्रभाव चारधाम यात्रा तथा तीर्थ पर्यटन पर किस तरह पड़ता है।
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