देश की सियासत में हलचल मच गई है। चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में साफ शब्दों में कहा है—
“Special Intense Revision (SIR) पर फैसला सिर्फ चुनाव आयोग का अधिकार है, अदालत इसमें दखल नहीं दे सकती।” 🔥
🏛️ सुप्रीम कोर्ट में दो टूक
चुनाव आयोग ने अदालत से कहा:
- मतदाता सूची सुधारना (SIR) सिर्फ EC का काम है।
- संविधान के अनुच्छेद 324 ने आयोग को ये अधिकार दिया है।
- अदालत का इस प्रक्रिया में कोई रोल नहीं।
🔥 सियासत में बढ़ा तापमान
EC का यह बयान आते ही विपक्ष और याचिकाकर्ताओं को बड़ा झटका लगा।
समर्थक दलों ने कहा – “ये फैसला आयोग की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।”
विपक्ष ने इसे मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवालों से बचने की कोशिश बताया।
📌 क्यों मायने रखता है SIR?
SIR यानी Special Intense Revision के दौरान:
- फर्जी वोटरों की पहचान होती है।
- नए मतदाताओं के नाम जुड़ते हैं।
- पुरानी गलतियों को सुधारा जाता है।
यानी, ये प्रक्रिया ही लोकतंत्र की रीढ़ है।