नई दिल्ली: दुनिया की राजनीति इन दिनों किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं लग रही। तीन दिन और तीन देश—जापान, नेपाल और फ्रांस—की सरकारें धराशायी हो गईं। इसने पूरी दुनिया को राजनीतिक अस्थिरता के गहरे भंवर में धकेल दिया है।
जापान: आर्थिक संकट ने सत्ता को गिराया
जापान जैसे स्थिर माने जाने वाले देश में अचानक सरकार गिरना दुनिया के लिए चौंकाने वाली खबर है। प्रधानमंत्री पर महंगाई और बेरोजगारी को नियंत्रित न कर पाने के आरोप लगे। संसद में अविश्वास प्रस्ताव पास हुआ और कैबिनेट को इस्तीफा देना पड़ा। इसका सीधा असर टोक्यो स्टॉक मार्केट पर दिखा और एशियाई निवेशकों में घबराहट बढ़ी।
नेपाल: जनता के गुस्से से टूटी सत्ता
नेपाल की जनता कई महीनों से भ्रष्टाचार और महंगाई को लेकर आक्रोशित थी। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन इतना बढ़ा कि संसद तक आग पहुंच गई। सत्ता पक्ष और विपक्ष की लड़ाई में प्रधानमंत्री ने पद छोड़ दिया और राष्ट्रपति ने संसद भंग कर दी। अब नेपाल एक बार फिर से राजनीतिक अस्थिरता की ओर बढ़ गया है, जैसे श्रीलंका ने कुछ साल पहले देखा था।
फ्रांस: राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री में टकराव
यूरोप की ताकत माने जाने वाले फ्रांस में संकट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच बढ़ते विवाद से खड़ा हुआ। पेंशन सुधार और प्रवासन नीति पर लगातार गतिरोध रहा। संसद में बहुमत खोने के बाद प्रधानमंत्री ने इस्तीफा दे दिया और फ्रांस की सरकार गिर गई। इस घटनाक्रम ने पूरे यूरोप को हिला दिया है।
वैश्विक असर
जापान, नेपाल और फ्रांस की सरकारों का महज तीन दिनों में गिरना केवल संयोग नहीं लगता। यह एक संकेत है कि दुनिया में लोकतंत्र और राजनीतिक स्थिरता कितनी नाजुक हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में चिंता बढ़ गई है और कूटनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि आगे की राह कितनी कठिन होने वाली है।