उत्तराखण्ड के आँगनवाड़ी केंद्रों में ‘हरित क्रांति’: 20,000 केंद्रों पर गूंजी पर्यावरण संरक्षण की पुकार!

देहरादून, 05 जून, 2025:

आज विश्व पर्यावरण दिवस 2025 के अवसर पर उत्तराखण्ड में एक अभूतपूर्व और प्रेरक पहल देखने को मिली! महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने राज्य भर के लगभग 20,000 आँगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ विशाल पौधरोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यह केवल पेड़ लगाने का अभियान नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी जगाने का एक मजबूत संदेश है।

छोटे कदम, बड़ा प्रभाव:

आँगनवाड़ी केंद्रों की हरित पहल इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों, माताओं और समुदाय के सदस्यों के बीच पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कल्पना कीजिए, 20,000 स्थानों पर एक साथ, नन्हे हाथों ने मिट्टी को छुआ और नए जीवन को रोपा! यह दृश्य अपने आप में एक शक्तिशाली संदेश है। अभियान के तहत फलदार, छायादार और औषधीय पौधों को प्राथमिकता दी गई, जो न केवल पर्यावरण को लाभ पहुँचाएंगे बल्कि आँगनवाड़ी केंद्रों को एक हरा-भरा और स्वस्थ वातावरण भी देंगे।

आँगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएँ इस पहल की रीढ़ रही हैं। उन्होंने स्थानीय बच्चों, उनकी माताओं और समुदाय के सदस्यों को साथ लेकर इस अभियान को सफल बनाया। यह सामुदायिक भागीदारी ही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी शक्ति है।

रेखा आर्या मंत्री का संदेश: “पर्यावरण संरक्षण सबकी जिम्मेदारी!”

उत्तराखण्ड की माननीय महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से ही संभव है। आँगनवाड़ी केंद्रों द्वारा यह पहल एक सकारात्मक और स्थायी बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।” उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार जनभागीदारी के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

निरंतर निगरानी, स्थायी परिणाम

विभागीय निदेशक, प्रशांत आर्य जी ने बताया कि लगाए गए हर पौधे की देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित आँगनवाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं को सौंपी गई है। साथ ही, इसकी सतत निगरानी भी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि लगाए गए पौधे जीवित रहें और बड़े हों। यह कदम इस अभियान की दीर्घकालिक सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल पौधे लगाना ही काफी नहीं, उनकी देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण की शपथ और एक हरित भविष्य का संकल्प

इस अवसर पर विभाग के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और विशेष रूप से आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। उन्होंने यह संकल्प लिया कि वे भविष्य में भी ऐसी पहलों के माध्यम से प्रदेश को स्वच्छ, हरित एवं सुंदर बनाए रखने में सहयोग करते रहेंगे। यह शपथ सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक प्रतिबद्धता है जो उत्तराखण्ड को एक बेहतर, हरा-भरा भविष्य देने का वादा करती है।
यह अभियान दिखाता है कि छोटे स्तर पर किए गए प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। आँगनवाड़ी केंद्र, जो अक्सर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समुदाय के केंद्र होते हैं, अब पर्यावरण जागरूकता और संरक्षण के प्रतीक बन रहे हैं। यह उत्तराखण्ड को एक स्वच्छ और हरित प्रदेश बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

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