देहरादून में सोमवार को एक ज़ोरदार प्रेस कांफ्रेंस में उत्तराखंड के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश की दो बड़ी चिटफंड कंपनियों—सोशल म्यूचुअल बेनिफिट इंडिया लिमिटेड और LUCC लिमिटेड—के घोटालों की जांच सरकार जानबूझकर दबा रही है, जबकि हज़ारों निवेशक अपने जीवन की कमाई गंवा चुके हैं।
त्रिवेंद्र रावत के पूर्व सलाहकार की कंपनी पर सीधा निशाना
विधायक उमेश कुमार ने सोशल म्यूचुअल बेनिफिट कंपनी को लेकर चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि यह कंपनी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के तत्कालीन सलाहकार केएस पवार से जुड़ी है। उमेश कुमार के मुताबिक, उन्होंने तीन साल पहले इस कंपनी के खिलाफ विस्तृत शिकायत ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) को सौंपी थी, जिस पर जांच के आदेश तो हुए, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने करीब 200 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की है, और यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा चिटफंड घोटाला हो सकता है। उन्होंने सवाल किया कि जब इतने बड़े पैमाने पर घोटाले के सबूत मौजूद हैं, तो सरकार इस मामले को CBI को क्यों नहीं सौंप रही?
LUCC पर 700 करोड़ की ठगी, सरकार मौन क्यों?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उमेश कुमार ने राज्य की एक और विवादित कंपनी LUCC लिमिटेड का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि इस कंपनी ने लगभग 700 करोड़ रुपये की ठगी की है, जिसमें गरीब, मजदूर और रिटायर्ड कर्मचारियों की जमा पूंजी डूब गई। इसके बावजूद राज्य सरकार न तो किसी तरह की जांच बैठा रही है और न ही कंपनी मालिकों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है।
“CBI जांच नहीं हुई तो होगा आर-पार का संघर्ष”
विधायक उमेश कुमार ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी कि अगर इन दोनों मामलों की जांच सीबीआई को नहीं सौंपी गई, तो वे आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि,
“ये भ्रष्टाचार की सरकार है, जो चोरों की ढाल बनी हुई है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो हम सड़क से विधानसभा तक हंगामा करेंगे। जरूरत पड़ी तो सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे।“
हज़ारों निवेशकों में आक्रोश
इन दोनों कंपनियों के खिलाफ राज्यभर में हज़ारों निवेशकों ने शिकायतें की हैं। कई मामलों में लोगों की जमा पूंजी डूब चुकी है, लेकिन न्याय की कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही। अब जब विधायक स्तर पर आवाज़ उठ रही है, तो लोगों को न्याय की एक नई उम्मीद जगी है।
सियासी भूचाल के आसार
उमेश कुमार का यह आरोप न सिर्फ आर्थिक घोटाले की तरफ इशारा करता है, बल्कि राज्य की भ्रष्टाचार विरोधी छवि पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अगर यह मामला तूल पकड़ता है, तो आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा उबाल आ सकता है।
