हरिद्वार, 24 सितंबर: सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरिद्वार जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने कड़क निर्देश जारी किए हैं। मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सड़क सुरक्षा एवं दुर्घटना न्यूनीकरण अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को तेज रफ्तार वाहन, ओवरलोडिंग और बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)जिलाधिकारी ने कहा कि नियमों का पालन न करने वाले वाहन चालकों पर ई-चालान सीधे घर भेजा जाएगा, जिससे लोगों में सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की जागरूकता बढ़े। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जनपद में स्पीडगन की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि रैश ड्राइविंग पर अंकुश लगाया जा सके।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सभी स्कूल बसों की सुरक्षा जांच की जाए, जिसमें शीशे, ग्रिल और जीपीएस ट्रैकर सहित सभी सुरक्षा व्यवस्थाएं सुनिश्चित हों। इसके साथ ही स्कूलों में महिला कंडक्टर को प्रोत्साहित किया जाए।
सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और जागरूकता बढ़ाने के लिए जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालयों और कॉलेजों में जन जागरूकता कैंप आयोजित किए जाएँ, और सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में अच्छा कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियों को सम्मानित किया जाए।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने गुड सेमेरिटन शैलेश शर्मा को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया, जिन्होंने पिछले वर्ष पुहाना रोड भगवानपुर में हुई सड़क दुर्घटना में घायल दो लोगों को समय पर मदद कर अस्पताल में भर्ती कर उनकी जान बचाई।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी निखिल शर्मा ने बताया कि बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। महत्वपूर्ण चौराहों पर सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई गई है, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी निगरानी रखी जा सके।
बैठक में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की दीपक रामचंद सेठ, अधीक्षण अभियंता लोनिवि डीवी सिंह, एआरटीओ एल्विन रॉक्सी, एआरटीओ (ई) हरिद्वार नेहा झा, एआरटीओ (ए) हरिद्वार निखिल शर्मा, एआरटीओ (ए) कृष्ण चंद्र पलारिया, अधिशासी अभियंता लोनिवि दीपक कुमार, सीओ ट्रैफिक संजय चौहान और एनएचएआई इन्सीडेंट मैनेजर अतुल कुमार शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय से कार्य करते हुए सड़क सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराएँ, ताकि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या न्यूनतम हो और जनता सुरक्षित रहे।
