देहरादून – शहर की सड़कें जब किसी क्रांति की साक्षी बनती हैं, तो वह दृश्य केवल यातायात नहीं, परिवर्तन का प्रतीक बन जाता है। रविवार की सुबह देहरादून की गलियों में कुछ ऐसा ही हुआ, जब तेजस्विनी चैरिटेबल ट्रस्ट के तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘झांसी ऑन व्हील्स’ वूमेन बाइक रैली में सैकड़ों महिलाओं ने सवार होकर वो संदेश दिया, जो सदियों से दबाया जाता रहा –
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)“हम कमजोर नहीं हैं, हम शक्ति हैं।”
बाइक, स्कूटर और हार्ले डेविडसन जैसी दमदार मोटरसाइकिलों पर निकली इन महिलाओं ने साफ कर दिया कि अब वह दौर पीछे छूट चुका है जब महिलाएं सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित थीं। ये रैली नहीं थी, यह एक आंदोलन था – अपनी आज़ादी, सुरक्षा, और अधिकारों के लिए।

कनक चौक से सेंट्रियो मॉल तक का यह जोशभरा सफर, सुभाष रोड और राजपुर रोड की गलियों से होता हुआ जब हाथी बड़कला की ओर मुड़ा, तो सड़कें इस आत्मबल की गूंज से भर उठीं।
रैली का समापन सेंट्रियो मॉल में हुआ, जहां रंगारंग कार्यक्रम के साथ उन सभी महिलाओं को सम्मान पत्र देकर नमन किया गया, जिन्होंने समाज की पुरानी सोच को चुनौती देने की हिम्मत दिखाई।
कार्यक्रम की संयोजक प्रिया गुलाटी ने स्पष्ट कहा –
“हमारा उद्देश्य सिर्फ रैली नहीं, समाज को झकझोरना है। महिलाएं जब सड़कों पर निकलती हैं, तो न सिर्फ ट्रैफिक बदलता है, सोच भी बदलती है। आज की नारी तय करेगी कि वो क्या पहने, कब निकले और कहां जाए – उसे किसी की इजाज़त नहीं चाहिए।”
कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध मॉडरेटर परवेज़ ग़ाज़ी ने किया, और हास्य कवि फेमस खतौली ने अपनी शायरी से माहौल में ऊर्जा भर दी।

इस कार्यक्रम में मौजूद थीं वो महिलाएं, जो स्वयं उदाहरण हैं –
- डॉ. प्रिया पांडे कौशिक – शिक्षा और सेवा का संगम
- एडवोकेट रितु गुजराल – न्याय के क्षेत्र की प्रेरणा
- डॉ. जसलीन कालरा शर्मा – चिकित्सा और करुणा की मिसाल
- किरण सिंह – समाज सेवा का सशक्त चेहरा
- अर्चना यादव कपूर, शैली सचदेवा, अंशिका खुराना, आचार्य वर्षा – वे नाम, जो आने वाली पीढ़ियों को रौशनी दिखाते हैं।
कार्यक्रम में महिलाएं थीं, शक्ति थी, संकल्प था – और सबसे ऊपर, वो आत्मविश्वास था जिसने कहा:
“अब हमारी चुप्पी नहीं, हमारी चिंगारी बोलेगी। हम झांसी की रानी थीं, हैं और रहेंगी।”
इस ऐतिहासिक मौके पर मुख्य अतिथि सविता कपूर (विधायक), नेहा जोशी (भाजयुमो राष्ट्रीय अध्यक्ष), ऐश्वर्या बिष्ट (मिस उत्तराखंड एशिया), और सौरभ थपलियाल (मेयर) ने महिलाओं की इस पहल को सलाम किया।
यह सिर्फ एक रैली नहीं थी। यह वो चलती हुई पुकार थी, जो हर बेटी, बहन, मां और स्त्री को अपने भीतर की शक्ति पहचानने का आह्वान दे रही थी।
