स्थायी रोजगार सृजन की दिशा में गैरसैंण संगोष्ठी सम्पन्न — कृषि और पशुपालन बने आत्मनिर्भर उत्तराखंड का आधार

भराड़ीसैंण विधानसभा में हुआ दो दिवसीय विचार-मंथन

भराड़ीसैंण (गैरसैंण) स्थित उत्तराखंड विधानसभा भवन में आयोजित “स्थायी रोजगार सृजन – विकसित उत्तराखंड का आधार” विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुक्रवार को विधिवत समापन हुआ।
इस अवसर पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक ऋतु खण्डूडी भूषण ने कार्यक्रम में प्रतिभाग करते हुए कहा कि “स्थायी रोजगार की दिशा में कृषि और पशुपालन जैसे पारंपरिक क्षेत्रों को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना आज समय की आवश्यकता है।”

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कृषि एवं पशुपालन विषय पर विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

संगोष्ठी के समापन दिवस पर आयोजित चतुर्थ सत्र में कृषि और पशुपालन विषयों पर गहन चर्चा हुई।
इस सत्र में देहरादून के मोहन भारद्वाज ने मशरूम उत्पादन के माध्यम से स्वरोजगार की संभावनाएँ बताईं, जबकि चमोली के नीरज भट्ट ने फूलों की खेती के सफल प्रयोग साझा किए।
रुद्रप्रयाग के सुखदेव पंत ने कीवी उद्यानीकरण पर अपने अनुभव रखे और पौड़ी के पवन पांडे ने कृषि-बागवानी के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला।
वहीं, चमोली के संदीप नेगी ने पशुपालन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी।

विशेषज्ञों का मत रहा कि पारंपरिक खेती में आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर ग्रामीण युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के नए द्वार खोले जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि और पशुपालन को स्वरोजगार से जोड़ना पलायन रोकने का प्रभावी उपाय बन सकता है।


युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी

गैरसैंण, कर्णप्रयाग, गोपेश्वर और कोटद्वार डिग्री कॉलेजों के उद्यमिता पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं ने संगोष्ठी में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
उन्होंने विशेषज्ञों से सीधे संवाद स्थापित करते हुए कृषि और पशुपालन से जुड़े व्यावहारिक प्रश्न रखे।
युवाओं की इस सहभागिता ने न केवल संगोष्ठी की सार्थकता को बढ़ाया बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखंड के विचार को और सशक्त किया।

सत्र के अंत में विद्यार्थियों ने विधानसभा अध्यक्ष से इस प्रकार की संगोष्ठियों का नियमित अंतराल पर आयोजन करने की माँग की।


‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर गरिमामय समापन

कार्यक्रम का समापन ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में एक विशेष क्षण के साथ हुआ।
इस अवसर पर सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने एक स्वर में वंदे मातरम् गान किया, जिससे पूरा सभागार देशभक्ति के भाव से गूंज उठा।
यह क्षण उत्तराखंड की सांस्कृतिक अस्मिता और सामूहिक भावना का सजीव प्रतीक बना।

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