सैंजी गांव में उम्मीद की लौ: धामी सरकार ने थामे आपदा पीड़ितों के हाथ, राहत राशि के साथ पहुंचा भरोसे का संदेश

उत्तराखंड के पहाड़ी अंचलों में कहर बनकर टूटी आपदा के बीच सरकार ने राहत और भरोसे की एक नई मिसाल पेश की है। पौड़ी गढ़वाल जिले के सैंजी गांव में आज एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर आंख नम कर दी और हर दिल को यह यकीन दिलाया कि सरकार सिर्फ वादों तक सीमित नहीं, ज़मीन पर उतरकर साथ निभा रही है।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद आपदा प्रभावित सैंजी गांव पहुंचे। मलबों और टूटे घरों के बीच खड़े लोगों की आंखों में जो सवाल थे, उनका जवाब सिर्फ भाषण नहीं बल्कि आर्थिक सहायता के रूप में दिया गया। मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से 15 पीड़ित परिवारों को ₹1.30 लाख प्रति परिवार की राहत राशि के चेक सौंपे। यह केवल आर्थिक मदद नहीं थी, बल्कि उजड़े आशियानों को फिर से बसाने की शुरुआत थी।

जिन्हें यह राहत राशि दी गई, उनमें प्रभा देवी, नीलम सिंह भण्डारी, भगत सिंह भण्डारी, पवन सिंह भण्डारी, विमला देवी, शाखा देवी, पवेली देवी, विमल सिंह, दीवान सिंह, रविन्द्र सिंह, जसवंत सिंह, गोपाल सिंह, मनोज सिंह, कृपाल सिंह और हेमराज सिंह शामिल हैं। इनके चेहरे पर राहत की एक हल्की मुस्कान यह बता रही थी कि शासन-प्रशासन सिर्फ कागज़ों में नहीं, वास्तव में काम कर रहा है।

इस दौरान गांव बुरांसी की दो महिलाओं – आशा देवी और विमला देवी – की आपदा में हुई मृत्यु के बाद उनके परिजनों को ₹2 लाख प्रति मृतक की सहायता दी गई। अनिल सिंह, शुगम सिंह, विक्रम सिंह और दीपक सिंह को मुख्यमंत्री ने स्वयं यह चेक सौंपा और परिवार को ढाढ़स बंधाया।

पर सबसे भावुक क्षण तब आया, जब केशर सिंह नाम के एक बुज़ुर्ग, जिनका घर आपदा में पूरी तरह ढह गया था, को ₹1.30 लाख की राहत राशि दी गई। मुख्यमंत्री ने उनका हाथ थामकर कहा – “हम आपका सब कुछ वापस तो नहीं ला सकते, लेकिन सरकार आपके साथ खड़ी है, हर कदम पर।”

सरकार ने दिखाया संवेदनशीलता का चेहरा

इस पूरी पहल से स्पष्ट है कि उत्तराखंड सरकार सिर्फ आपदा प्रबंधन की प्रक्रिया नहीं निभा रही, बल्कि मानवीयता के उस स्तर पर काम कर रही है, जहां राहत राशियां सिर्फ मदद नहीं होतीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत होती हैं।

• ✅ राहत राशि सीधा पीड़ितों के हाथ में

• ✅ मृतकों के परिजनों को सम्मानजनक मुआवजा

• ✅ पुनर्निर्माण को प्राथमिकता

• ✅ मुख्यमंत्री ने खुद संभाली ज़िम्मेदारी

यह सिर्फ राहत नहीं, सरकार की जवाबदेही का उदाहरण है। पहाड़ों में जब कभी संकट आता है, तो लोग यही पूछते हैं – “सरकार कहां है?” आज उत्तराखंड ने इसका जवाब दे दिया है – “सरकार यहीं है, आपके बीच, आपके साथ।”

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