लोहड़ी-बैसाखी पर छुट्टी की मांग लेकर विधानसभा अध्यक्ष से मिला पंजाबी महासभा प्रतिनिधिमंडल

उत्तराखंड में बहुसांस्कृतिक ताने-बाने को सशक्त करने की दिशा में आज एक अहम पहल हुई, जब उत्तराखंड पंजाबी महासभा का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य की विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण से उनके शासकीय आवास, यमुना कॉलोनी में शिष्टाचार भेंट हेतु पहुँचा।

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यह मुलाक़ात केवल औपचारिक नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को स्वर देने वाली साबित हुई। प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष के समक्ष पंजाबी समाज से जुड़े कई मुद्दों को गंभीरता से उठाया, जिनमें प्रमुख रूप से लोहड़ी और बैसाखी पर्वों को राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने की मांग की गई।

सांस्कृतिक विरासत के लिए मान्यता की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने अपने प्रस्तुतीकरण में यह रेखांकित किया कि लोहड़ी और बैसाखी जैसे पर्व केवल त्योहार नहीं, बल्कि एक पूरे समुदाय की सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़े हैं। देश के अनेक राज्यों में इन पर्वों पर अवकाश घोषित होता है, जबकि उत्तराखंड जैसे बहुजातीय राज्य में अब तक इनकी उपेक्षा होती रही है।

प्रतिनिधियों का कहना था कि प्रदेश में पंजाबी समाज की जनसंख्या हजारों में है और यह समुदाय राज्य के सामाजिक, शैक्षणिक, व्यापारिक एवं परोपकारी क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी कर रहा है। ऐसे में इन पर्वों को अवकाश के रूप में मान्यता देना न केवल सांस्कृतिक सम्मान का प्रतीक होगा, बल्कि राज्य सरकार की समावेशी दृष्टिकोण को भी दर्शाएगा।

विधानसभा अध्यक्ष ने दिया आश्वासन

विधानसभा अध्यक्ष श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और उनके सामाजिक योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा उठाए गए विषयों को उचित मंचों पर गंभीरता से प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड की ताकत उसकी सांस्कृतिक विविधता है और पंजाबी समाज इस पहचान का एक अभिन्न अंग है।

प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन रहे शामिल

इस प्रतिनिधिमंडल में पंजाबी समाज की विभिन्न संस्थाओं और क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें श्री हरीश नारंग, श्री सुभाष कोहली, श्री राकेश ओबेरॉय, श्री मन्नू कोचर, श्री प्रेम कश्यप, श्री अनिल मारवाह, डॉ. कुलदीप दत्ता, श्री विपुल डावर, श्री राजीव बेरी, श्री गगन सेठी, डॉ. हरीश कोहली, श्री सतीश कपूर, श्री आशीष नागरथ, श्री नीरज कोहली, श्री गोपाल पुरी, श्री विनय कोहली, श्री प्रतीक कालिया, श्री केवल कृष्ण लांबा, श्री प्रदीप कोहली, श्री मनीष गेरा, श्री संजीव विज, श्री नरेश चंडोक, श्री जितेन्द्र खरबंदा, श्री राजू गुलाटी, श्री विजय कोहली, श्री लाल चंद शर्मा, श्री अरुण खरबंदा एवं श्री राकेश मल्होत्रा शामिल रहे।

पंजाबी समाज की बढ़ती भूमिका

उत्तराखंड में पंजाबी समाज वर्षों से व्यापार, समाज सेवा, शिक्षा और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। ऐसे में उनकी सांस्कृतिक पहचान को सरकारी स्तर पर मान्यता देना, राज्य की समावेशी और बहुलतावादी नीतियों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

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