उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने नंदा देवी राजजात यात्रा की तैयारियों को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह यात्रा उत्तराखंड की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान से जुड़ी है, अतः इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें ताकि श्रद्धालुओं को यात्रा के दौरान कोई असुविधा न हो। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधियों, नंदा राजजात समिति के सदस्यों और स्थानीय हितधारकों के सुझावों को शामिल कर ही योजनाएं बनाई जाएं।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि:
- एक उच्च स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया जाए, जो यात्रा की संपूर्ण निगरानी और क्रियान्वयन सुनिश्चित करे।
- पिछली यात्राओं के अनुभवों से सीख लेकर इस बार ठहरने, भोजन, पेयजल और शौचालय जैसी व्यवस्थाएं और सुदृढ़ की जाएं।
- यात्रा मार्ग पर दूरसंचार सेवाओं को बेहतर बनाया जाए और श्रद्धालुओं की निगरानी हेतु डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाए।
- मेडिकल कैंप, डॉक्टरों की टीम और एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
- श्रद्धालुओं की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए।
- यात्रा से जुड़ी लोक कथाओं और लोक गीतों का अभिलेखीकरण कराया जाए।
- पर्यटन विभाग को यात्रा के प्रमुख पड़ावों और सांस्कृतिक महत्व का विस्तृत प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए।
- यात्रा मार्गों पर पार्किंग स्थल पर्याप्त संख्या में बनाए जाएं।
- जिन जिलों और गांवों से डोलियां या श्रद्धालु शामिल होते हैं, वहां की सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान और आत्मा का प्रतीक है। प्रशासन और आमजन के सहयोग से इसे भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप दिया जाए।
