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एशिया कप 2025 का भारत-पाकिस्तान मुकाबला, जिसे क्रिकेट का महामुकाबला कहा जाता है, इस बार अपने पुराने रंग और जोश से कोसों दूर है।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)पहलगाम हमले में निर्दोष नागरिकों की शहादत और भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का मुरिदके बेस भले ही ध्वस्त हुआ, लेकिन खबर है कि आतंकी संगठन फरवरी तक उसे फिर से खड़ा करने की तैयारी में है। इन हालातों ने पूरे देश को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है।
टिकट बिक्री पर भी पड़ा असर – आधी सीटें खाली
भारत-पाक मैचों के टिकट हमेशा हाथों-हाथ बिक जाते थे। लेकिन इस बार तस्वीर बिलकुल अलग है—
- दुबई में होने वाले इस मैच की आधी टिकटें अब तक नहीं बिक सकी हैं।
- दर्शकों का जोश ठंडा पड़ा है और विरोध की लहर टिकट खिड़की तक साफ दिख रही है।
टॉप अधिकारियों का दूर रहना – साइलेंट बॉयकॉट?
पिछली बार जब दुबई में चैंपियंस ट्रॉफी का मैच हुआ था, तब बीसीसीआई और खेल मंत्रालय के बड़े अधिकारी मौजूद थे। लेकिन इस बार हालात उलट हैं—
- BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने मैच में शामिल न होने का फैसला लिया है।
- सूत्रों के मुताबिक, भारत से कोई बड़ा अधिकारी अभी तक दुबई नहीं पहुंचा है, सिर्फ 1 अधिकारी की संभावना जताई जा रही है।
- क्रिकेट जगत में सवाल उठ रहा है—क्या यह “Silent Boycott” है?
विज्ञापन दरों में 20% की भारी गिरावट
पहले जहां भारत-पाक मैच के लिए विज्ञापनदाता करोड़ों खर्च करने को तैयार रहते थे,
- वहीं इस बार 10 सेकंड की एड स्पॉट दरें ₹10–15 लाख से गिरकर लगभग 20% कम हो गई हैं।
- वजह है दर्शकों का ठंडा उत्साह और घटती व्यूअरशिप।
खिलाड़ियों का जज्बा, लेकिन दर्शकों का दर्द
भारतीय टीम मैदान पर जरूर उतरेगी और कप्तान ने साफ कहा है—
“यह मैच क्रिकेट से आगे है। हमारा हर रन और हर विकेट शहीदों को समर्पित होगा।”
लेकिन सवाल ये है कि जब दर्शक और अधिकारी ही दूरी बना रहे हैं, तो क्या यह मुकाबला अपने पुराने जोश और रंग को वापस ला पाएगा?
आतंक की छाया और देश का आक्रोश
लश्कर-ए-तैयबा का बेस फिर से खड़ा करने की खबर ने भारत में गुस्से की लहर को और तेज कर दिया है। आम जनता मानती है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी स्तर पर क्रिकेट खेलना शहीदों का अपमान है।
