उत्तराखंड सरकार व परमार्थ निकेतन का पावन आह्वान
भारत की आत्मा उसके पवित्र तीर्थों में बसती है। हिमालय की गोद में बसे वे तीर्थ जिन्हें चारधाम कहा गया – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री – केवल भूगोल नहीं, धर्म, भक्ति और आत्मिक शुद्धि के ज्योतिर्मय केंद्र हैं। यह यात्रा केवल पदयात्रा नहीं, यह आत्मा की चिरंतन यात्रा है — देह से देहातीत की ओर, अज्ञान से आत्मज्ञान की ओर।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)इसी भाव को जीवंत करते हुए उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी और परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं से अपील की है —
“आइए, इस वर्ष चारधाम यात्रा पर चलें और अपने जीवन को भक्ति, सेवा, संस्कृति और आत्मिक शांति से भर दें।”
चारधाम यात्रा का आध्यात्मिक महत्त्व
चारधाम, वे चार धाम जहाँ हिंदू आस्था का गूढ़तम रहस्य छिपा है:
- केदारनाथ – महादेव की अखंड उपस्थिति, मृत्यु के भय से मुक्ति का द्वार
- बद्रीनाथ – नारायण का परम धाम, मोक्ष व वैराग्य का पथ
- गंगोत्री – माँ गंगा की निर्मल धारा, आत्मा की शुद्धि का स्त्रोत
- यमुनोत्री – माँ यमुना का स्नान स्थल, जीवन में शीतलता और माधुर्य का आह्वान
सरकार और संतों का संयुक्त प्रयास
उत्तराखंड सरकार ने इस बार यात्रा व्यवस्था को डिजिटल, सुरक्षित और सुगम बनाया है। ई-पंजीकरण, हेल्थ चेकअप, ट्रैकिंग सिस्टम, ई-वाहन और तीर्थ यात्रियों की हर सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाएँ चाक-चौबंद हैं।
वहीं परमार्थ निकेतन के नेतृत्व में चल रही “स्वच्छ तीर्थ – स्वच्छ भारत” मुहिम, सेवा, ध्यान, गंगा आरती और पर्यावरण संरक्षण से यात्रा को आध्यात्मिक ही नहीं, सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की धुरी भी बना रही है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती जी का संदेश
“चारधाम केवल यात्रा नहीं, यह जीवन को भीतर से निर्मल करने की प्रक्रिया है। जब हम तीर्थों की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो हम स्वयं के सत्य स्वरूप की ओर बढ़ते हैं। इस बार चलें – सेवा, साधना और सद्भावना के साथ।”
आह्वान सबके लिए
चाहे आप देश में हों या विदेश में, चाहे युवा हों या वृद्ध — यह यात्रा हर सनातनी आत्मा का आंतरिक संकल्प है। उत्तराखंड की भूमि बुला रही है —
“चलो बुलावा आया है, चारधाम से बुलावा आया है।”
अब समय है उठने का, पवित्र हिमालय की ओर बढ़ने का, माँ गंगा और भगवान बद्रीविशाल के साक्षात्कार का।
इस बार अपने भीतर के धाम को जाग्रत करने का संकल्प लें।
