देहरादून का परेड ग्राउंड उस सुबह बिल्कुल अलग नज़ारे का गवाह बना। राष्ट्रीय खेल दिवस-2025 का आयोजन था और मंच पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मौजूद थे। सामने बैठे थे सैकड़ों युवा खिलाड़ी—किसी के गले में एथलेटिक्स का पदक चमक रहा था, तो कोई फुटबॉल, हॉकी या तीरंदाजी में अपनी प्रतिभा से सबका ध्यान खींच रहा था। माहौल सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम का नहीं था, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे धामी और खिलाड़ियों के बीच कोई आत्मीय रिश्ता है—जैसे परिवार का मुखिया अपने बच्चों के सपनों को सच करने का भरोसा दे रहा हो।
खेल दिवस पर धामी का बड़ा ऐलान
मेजर ध्यानचंद की जयंती पर आयोजित इस खास अवसर को मुख्यमंत्री धामी ने केवल भाषण भर से सीमित नहीं रखा। उन्होंने पूरे जोश के साथ घोषणा की—“प्रदेश में जल्द ही स्पोर्ट्स लेगेसी प्लान लागू किया जाएगा।” यह घोषणा सिर्फ शब्दों की औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक दूरगामी विज़न का हिस्सा थी। इसका अर्थ है कि उत्तराखंड के हर युवा को यह संदेश मिले—“तुम्हारा सपना यहीं से शुरू होगा, और सरकार तुम्हारे साथ खड़ी है।”
खिलाड़ियों को सम्मान और प्रोत्साहन
समारोह में 250 से अधिक पदक विजेता खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को 16 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि भेंट की गई। जब मंच पर एक-एक खिलाड़ी सम्मान लेने आया, तो मुख्यमंत्री धामी के चेहरे पर वही गर्व और आत्मीयता झलक रही थी, जो एक पिता के चेहरे पर अपने बच्चों को सफल होते देख होती है। यही मानवीय पहलू उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाता है। उनके लिए खिलाड़ी “पुरस्कार विजेता” नहीं, बल्कि प्रदेश की पहचान और भविष्य हैं।
खेल आधारभूत ढांचे को नई दिशा
मुख्यमंत्री धामी ने परेड ग्राउंड में ही खिलाड़ियों के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट की घोषणा की। जल्द ही यहां एथलेटिक्स सिंथेटिक ट्रैक और पवेलियन ग्राउंड में सिंथेटिक फुटबॉल टर्फ तैयार होगा। इसका सबसे बड़ा असर यह होगा कि अब खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दिल्ली या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
धामी का विज़न साफ है—“उत्तराखंड का युवा यहीं से विश्वस्तरीय प्रशिक्षण पाए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके।”
खेलों के प्रति धामी की संवेदनशीलता
जब धामी खिलाड़ियों से संवाद करते हैं, तो उनकी भाषा में नेताओं वाला ठहराव कम और एक कोच या अभिभावक जैसी संवेदनशीलता ज्यादा होती है। वे लगातार कहते हैं—“हमारे खिलाड़ियों को उचित अवसर, सम्मान और प्रोत्साहन देना हमारी जिम्मेदारी है।”
इसी सोच का नतीजा है कि राज्य में लगातार नई योजनाएँ लागू हो रही हैं—खेल छात्रवृत्ति, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण केंद्र, और हर जिले में खेल अकादमी जैसी पहलें।
डबल इंजन सरकार और खेलों का भविष्य
धामी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फिट इंडिया और खेलो इंडिया अभियानों को उत्तराखंड की धरती पर गहराई तक उतारने में जुटे हैं। वे मानते हैं कि खेल केवल मेडल जीतने का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की नींव है। इसी दृष्टिकोण से वे देवभूमि को खेलभूमि बनाने का सपना साकार कर रहे हैं।
उम्मीदों से भरी तस्वीर
परेड ग्राउंड में जब सम्मानित खिलाड़ियों के चेहरे पर आत्मविश्वास और खुशी दिखी, तो यह साफ हो गया कि मुख्यमंत्री धामी का यह विज़न सिर्फ कागज़ों पर नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत में बदल रहा है।
खिलाड़ी अब केवल अपने गांव या कस्बे का नाम नहीं रोशन करेंगे, बल्कि उत्तराखंड और पूरे भारत का मान बढ़ाएंगे—और इस राह के मार्गदर्शक खुद मुख्यमंत्री धामी होंगे।