जिलाधिकारी सविन बंसल के हस्तक्षेप से विधवा शोभा का 17 लाख का ऋण माफ, बैंक ने लौटाए घर के कागजात

देहरादून। 01 अक्टूबर – जिला प्रशासन देहरादून ने एक बार फिर अपने त्वरित और न्यायप्रिय कार्यों से जनमानस में विश्वास जगाया है। जिलाधिकारी सविन बंसल के सख्त और संवेदनशील हस्तक्षेप के चलते विधवा शोभा को बड़ी राहत मिली। शोभा, जो दो बच्चों की परवरिश कर रही हैं और जिनके एक पुत्र 100 प्रतिशत दिव्यांग हैं, पिछले कुछ समय से बैंक ऋण और वसूली की प्रताड़ना से जूझ रही थीं।

विधवा शोभा ने अपने परिवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय क्लेक्टेªट में व्यक्तिगत रूप से जाकर अपनी व्यथा सुनाई। उनका पति मनोज रावत अक्टूबर 2024 में आकस्मिक निधन हो चुके थे। उनके द्वारा लिया गया कुल 17 लाख रुपए का लोन, बीमित होने के बावजूद बैंक द्वारा वसूली के लिए परिवार पर दबाव डाला जा रहा था।

शोभा के परिवार की मुश्किलें बड़ी थीं – घर का खर्च, बेटी की पढ़ाई और दिव्यांग बेटे की देखभाल। बैंक द्वारा बीमा क्लेम राशि रु. 13,20,662/- को लोन में समायोजित किया गया, लेकिन लगभग 5 लाख रुपए का शेष ऋण परिवार पर बोझ बनकर रह गया था।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने तुरंत एसडीएम न्याय कुमकुम जोशी को निर्देश दिए कि बैंक से शीघ्र नो ड्यूज सर्टिफिकेट (NOC) प्राप्त किया जाए। डीएम के सख्त निर्देश के तहत एसडीएम ने पिछले 10 दिनों से लगातार फॉलोअप किया और बैंक को सोमवार तक कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया। अन्यथा बैंक शाखा की संपत्ति कुर्क और नीलामी के लिए तैयार की जाएगी।

इस कड़ी कार्रवाई के परिणामस्वरूप, आईसीआईसीआई बैंक ने शोभा के घर जाकर उन्हें नो ड्यूज सर्टिफिकेट के साथ उनके संपत्ति के कागजात वापस किए। इस निर्णय ने न केवल शोभा और उनके बच्चों की चिंता को दूर किया, बल्कि उनके जीवन में उम्मीद और राहत का संचार किया।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस मामले पर कहा, “समस्या चाहे कितनी भी विकट क्यों न हो, जिला प्रशासन हर कदम पर जनता के साथ है। शिक्षा, रोजगार, ऋणमाफी और संपत्ति वापसी के लिए हम तत्पर हैं।”

वास्तव में, विधवा शोभा का 17 लाख का ऋण माफ होना और बैंक द्वारा कागजात लौटाना यह दिखाता है कि प्रशासन की न्यायप्रिय और संवेदनशील नीति असहाय और व्यथित लोगों के जीवन में बदलाव ला सकती है। अब शोभा अपनी बेटी की पढ़ाई और दिव्यांग पुत्र की देखभाल आसानी और निश्चिंत भाव से कर सकती हैं।

यह घटना जनमानस में प्रशासन के प्रति विश्वास को मजबूत करने वाली है और यह संदेश देती है कि डीएम का सख्त लेकिन संवेदनशील हस्तक्षेप हमेशा न्याय दिला सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *