जनवरी के आखिरी छह दिन में ही चार जगह गढ़वाल के पौड़ी में चीड़ के वन, वरुणावत के जंगल, पीपलकोटी समेत उत्तरकाशी की वाड़ाहाट रेंज में आग लगने की घटनाएं हुईं। इससे आगामी फायर सीजन में क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।पिछले साल गढ़वाल और कुमाऊं के जंगलों में हुई भीषण तबाही को देखते हुए इस बार वनाग्नि रोकने के लिए शीतलाखेत मॉडल को अपनाने पर चर्चा चल रही है। हालांकि इस मॉडल की पहले भी सीएम तारीफ कर चुके हैं और इसे अपनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकारी कामकाज अपने तरीके से चलता रहा।
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