नगर निगम के टाउन हॉल में पद्म विभूषित स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा की चतुर्थ पुण्यतिथि के अवसर पर स्मृति सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में लद्दाख के एनवायरमेंट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए. इस मौके पर उन्होंने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की मांग दोहराई. उन्होंने कहा कि लद्दाख की जनता लगातार छठी अनुसूची की मांग कर रही है, ताकि स्थानीय निवासियों की सहमति के बिना कोई परियोजना लद्दाख में नहीं बन सके.
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)एनवायरमेंट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा कि लद्दाख को छठी अनुसूची और अलग असेंबली की मांग उनके द्वारा लगातार मांग उठाई गई है. सोनम वांगचुक का कहना है कि इन मांगों को लेकर लद्दाख के लोगों ने लेह से दिल्ली तक मार्च में निकाला था, जो दल एक माह का सफर तय करके 30 सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा था. अक्टूबर में गांधी जयंती के समय इन मांगों को लेकर अनशन भी किया गया था. 16 दिन के अनशन के बाद सरकार ने बातचीत का प्रस्ताव दिया था. उसके बाद से दो बार बातचीत भी हुई, लेकिन 3 महीने वार्ता में गैप होने होने के चलते लद्दाख के लोग परेशान हो गए.
अब 27 मई को एक बार मुख्य मांगों को लेकर फिर से वार्ता होने जा रही है. लेकिन बातचीत कितनी सकारात्मक होगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है. उन्होंने आगे कहा कि विकास के कार्यक्रमों को पांच या 10 सालों के लिए नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकारें तो हर 5 साल में बदल जाती है, लेकिन लोगों का जीवन पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहता है. इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि दूरदर्शिता के साथ योजनाएं बनानी चाहिए. इन सभी बातों की समझ स्थानीय लोगों को साथ लेने से ही मिलेगी. अगर उनके साथ समन्वय स्थापित करते हुए विकास किया जाए तो सही मायने में विकास कहलाएगा. दूसरी तरफ स्थानीय लोगों को भी जिम्मेदारी के साथ काम लेना होगा.
