उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की राजस्थान के मुख्यमंत्री से भेंट: राजनीतिक सौहार्द और सहयोग की नई पहल

जयपुर, 29 अप्रैल 2025उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को जयपुर स्थित सचिवालय में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा से शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात दोनों राज्यों के आपसी सहयोग, विकास कार्यों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को लेकर कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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मुख्यमंत्री धामी का जयपुर आगमन उत्तराखंड के पर्यटन, तीर्थाटन और सांस्कृतिक संबंधों को विस्तार देने के प्रयासों के तहत हुआ। जयपुर पहुंचने पर राजस्थान सरकार के अधिकारियों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। सचिवालय में हुई बैठक के दौरान दोनों मुख्यमंत्रियों ने उत्तराखंड और राजस्थान के बीच धार्मिक पर्यटन, आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण, और आपसी निवेश जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा की।

बैठक के प्रमुख बिंदु:

  • चारधाम यात्रा और ब्रज-मार्ग सहयोग: धामी ने कहा कि उत्तराखंड और राजस्थान की धार्मिक संस्कृति में गहरा संबंध है। राजस्थान के लाखों श्रद्धालु हर वर्ष उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री-यमुनोत्री की यात्रा करते हैं। इस यात्रा को सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने के लिए राजस्थान सरकार की ओर से विशेष बस-सेवाएं और सूचना केंद्रों की स्थापना पर चर्चा हुई।
  • आपदा प्रबंधन में संयुक्त कार्यशाला: उत्तराखंड एक पर्वतीय राज्य है जबकि राजस्थान रेगिस्तानी। दोनों राज्यों की भिन्न भौगोलिक स्थितियों के बावजूद आपदा प्रबंधन में एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने की जरूरत पर जोर दिया गया।
  • शिक्षा और युवाओं के लिए कार्यक्रम: युवाओं के लिए रोजगारपरक शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम की संभावना पर भी विचार हुआ।
  • जल संरक्षण और पारंपरिक जल-स्रोतों का पुनरुद्धार: दोनों मुख्यमंत्रियों ने जल संकट को गंभीरता से लेते हुए पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकों के आपसी आदान-प्रदान का समर्थन किया।

मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “राजस्थान और उत्तराखंड के संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भी हैं। इस मित्रता को हम और सशक्त करेंगे।”

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी इस मुलाकात को “दो देवभूमियों के बीच संवाद” बताते हुए कहा कि यह साझेदारी दोनों राज्यों के नागरिकों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भेंट केवल शिष्टाचार नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में संघीय समन्वय की एक अहम कड़ी बन सकती है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब दोनों राज्य भाजपा शासित हैं, आपसी सहयोग से राष्ट्रीय स्तर पर विकास की गति को नई दिशा देने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।

 

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