देहरादून। उत्तराखंड पुलिस साइबर अपराधों के खिलाफ एक मजबूत ढाल बनकर उभरी है। पुलिस मुख्यालय, देहरादून में जारी प्रेस नोट के अनुसार, राज्य पुलिस ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच ₹47.02 करोड़ की राशि साइबर ठगी पीड़ितों को वापस करवाई है। यह प्रदर्शन न केवल उत्तर भारत बल्कि पूरे देश में शीर्ष श्रेणी में गिना जा रहा है।
राष्ट्रीय अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP – 1930) और गृह मंत्रालय के I4C प्लेटफॉर्म के आंकड़ों के मुताबिक उत्तराखंड पुलिस ने “Money Saving” श्रेणी में अखिल भारतीय स्तर पर 6वां स्थान हासिल किया है। इसी तरह “Inter-State Coordination & Case Solving” में भी राज्य को 6वां स्थान प्राप्त हुआ है।
साइबर सुरक्षा में उत्तराखंड पुलिस देश में अग्रणी—₹47 करोड़ की राशि पीड़ितों को लौटाई, दोषसिद्धि दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी
ऑपरेशन ‘प्रहार’ और ‘हेली’ से साइबर नेटवर्क पर सर्जिकल स्ट्राइक
राज्य पुलिस ने न केवल राज्य के भीतर बल्कि देशभर के साइबर अपराध नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार किया है। “ऑपरेशन प्रहार” के तहत वर्ष 2025 में पूरे भारत में 65 से अधिक अपराधियों पर कार्रवाई की गई। वहीं “ऑपरेशन हेली” के अंतर्गत 150 से अधिक वेबसाइट्स, 150 व्हाट्सएप नंबर और बैंक खाते ब्लॉक किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों फेक फेसबुक और इंस्टाग्राम विज्ञापनों को भी समाप्त किया गया।
उत्तराखंड साइबर पुलिस की सक्रियता का प्रमाण यह भी है कि उसने दुबई, कंबोडिया और म्यांमार से जुड़े चीनी साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया। वर्ष 2022 में औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर पर छापा मारकर सिम बॉक्स बरामद किया गया और 12 से अधिक स्थानीय कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ हुआ।
उत्कृष्ट प्रदर्शन: दोषसिद्धि दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी
राज्य में दर्ज साइबर अपराध मामलों में पुलिस का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है। चार्जशीट दर औसतन 87% रही, जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 33.9% है। इसी प्रकार, दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) 64.7% दर्ज की गई, जो कि राष्ट्रीय औसत 27.2% से दोगुनी से अधिक है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि उत्तराखंड पुलिस केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अदालत में भी साक्ष्यों के दम पर न्याय सुनिश्चित कर रही है।
राज्य स्तरीय और अंतरराज्यीय अभियानों की सफलता
साइबर थाना देहरादून और उधमसिंह नगर द्वारा वर्ष 2023–24 में 20 से अधिक राज्य स्तरीय और अंतरराज्यीय साइबर ठगी मामलों का सफल निस्तारण किया गया। इन अभियानों में “फेक ट्रेडिंग ऐप”, “फिशिंग लिंक”, “OTP फ्रॉड” और “UPI ठगी” जैसी प्रमुख प्रवृत्तियों पर निर्णायक कार्रवाई की गई। बिहार, झारखंड और दिल्ली-एनसीआर से जुड़े सैकड़ों आरोपियों की गिरफ्तारी कर पुलिस ने नेटवर्क को जड़ से हिलाकर रख दिया।
सशक्त नेतृत्व और निरंतर मॉनिटरिंग
माननीय मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों तथा पुलिस महानिदेशक श्री दीपम सेठ के नेतृत्व में उत्तराखंड साइबर पुलिस लगातार लोगों के पैसे बचाने, अपराधियों को पकड़ने और जागरूकता अभियान चलाने में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
ADG लॉ एवं ऑर्डर/साइबर डॉ. वी. मुरूगेशन और IG लॉ एवं ऑर्डर/साइबर डॉ. नीलेश आनंद भरणे द्वारा मामलों की नियमित समीक्षा की जाती है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और तत्परता बनी रहती है।
DSCI द्वारा मिली राष्ट्रीय मान्यता
देश की शीर्ष आईटी संस्था DSCI (Data Security Council of India) ने वर्ष 2024 में उत्तराखंड साइबर पुलिस को भारत की शीर्ष तीन इकाइयों में स्थान दिया। यह सम्मान राज्य की साइबर सुरक्षा क्षमता, तकनीकी दक्षता और समय पर कार्रवाई की पहचान है।
अक्टूबर—साइबर जागरूकता माह
उत्तराखंड पुलिस ने घोषणा की है कि अक्टूबर माह को “साइबर अपराध जनजागरूकता माह” के रूप में मनाया जाएगा। इस दौरान कॉल सेंटरों की चेकिंग, ऑनलाइन ठगी की पहचान और जनता को डिजिटल सुरक्षा के प्रति शिक्षित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा।
राज्य की पुलिस ने एक स्पष्ट संदेश दिया है—“साइबर अपराधियों के लिए उत्तराखंड अब सुरक्षित ठिकाना नहीं।”