नई दिल्ली, 10 जुलाई 2025:
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक बार फिर अपने चुटीले अंदाज़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर तंज कसा है, लेकिन इस बार यह बयान केवल राजनीतिक विवाद नहीं बना, बल्कि सीधे विदेश मंत्रालय को बीच में उतरना पड़ा।
🌍 भगवंत मान का बयान – “कहाँ जाते हैं, किसे पता?”
एक जनसभा को संबोधित करते हुए भगवंत मान ने व्यंग्यात्मक लहज़े में कहा:
“भगवान ही जाने प्रधानमंत्री मोदी किस-किस देश में जाते हैं – ‘मैग्नेशिया’, ‘गैलवेसिया’, ‘टारवेसिया’ जैसे देशों में। वहाँ जाकर 10,000 की जनसंख्या वाले देशों से सम्मान ले रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि मोदी जिन देशों में जा रहे हैं, वे शायद मानचित्र पर भी ढूँढना मुश्किल हों, लेकिन वहाँ से “सबसे बड़ा सम्मान” लेकर लौट आते हैं।
⚡ विदेश मंत्रालय का तीखा प्रतिवाद
भगवंत मान के इस बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा:
“ये टिप्पणियाँ न केवल गैर-जिम्मेदाराना हैं, बल्कि भारत की विदेश नीति और मित्र देशों के साथ संबंधों को कमजोर करने वाली हैं।”
“भारत सरकार इन अनुचित टिप्पणियों से स्वयं को अलग करती है, जो कि राज्य पद पर आसीन किसी व्यक्ति को शोभा नहीं देतीं।”
🤝 सम्मान, केवल संख्याओं से नहीं
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी को हाल के वर्षों में पापुआ न्यू गिनी, फिजी, सुरिनाम, और भूटान जैसे छोटे लेकिन सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण देशों से कई प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान प्राप्त हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की एक्ट ईस्ट और ग्लोबल साउथ नीति का यह परिणाम है कि भारत को छोटे राष्ट्रों के साथ भी गहरे और रणनीतिक संबंध स्थापित करने में सफलता मिल रही है।
🔍 बयान की राजनीति या कूटनीतिक चूक?
यह पहला अवसर नहीं है जब भगवंत मान ने ऐसे बयान दिए हैं, लेकिन इस बार उनके शब्दों ने भारत की कूटनीतिक गरिमा और विदेश नीति की गंभीरता को भी कटघरे में लाने की कोशिश की। राजनीतिक आलोचकों का कहना है कि आंतरिक राजनीति के हथियार विदेश नीति के मंच पर चलाना, भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुँचा सकता है।
वहीं आम आदमी पार्टी के समर्थकों का तर्क है कि भगवंत मान ने सिर्फ “वास्तविकता और जन भावनाओं” को ह्यूमर के ज़रिए सामने रखा।
🧭 भारत की विदेश नीति पर असर?
विदेश मंत्रालय की तीखी प्रतिक्रिया इस ओर संकेत करती है कि सरकार भारत की विदेश नीति को आंतरिक राजनीति से अलग रखने को लेकर बेहद संजीदा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का असर आने वाले राजनीतिक विमर्श, विपक्ष की रणनीति और कूटनीतिक चर्चाओं पर कितना गहरा पड़ता है।
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