चंडीगढ़, 3 सितम्बर 2025 – पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में इस बार बड़ा राजनीतिक उलटफेर हुआ है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने पहली बार अध्यक्ष पद जीतकर नया इतिहास रच दिया। गौरव वीर सोहल विश्वविद्यालय के नए अध्यक्ष चुने गए।
नतीजों का समीकरण
इस चुनाव में एबीवीपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। आम आदमी पार्टी (AAP) समर्थित उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे, जबकि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी चौथे स्थान तक सिमट गए। अब तक पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति में वामपंथी और कांग्रेस खेमे का दबदबा रहा था, लेकिन इस बार नतीजों ने परंपरा तोड़ दी।
क्यों है यह जीत खास?
- पहली बार एबीवीपी ने पंजाब यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पद पर कब्जा किया।
- नतीजों से संकेत मिल रहा है कि युवाओं का रुझान अब राष्ट्रीय स्तर की छात्र राजनीति की ओर बढ़ रहा है।
- चुनाव से पहले एबीवीपी का जोर छात्रों की समस्याओं जैसे फीस, हॉस्टल और प्लेसमेंट मुद्दों पर रहा।
जश्न और माहौल
परिणाम घोषित होते ही एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया। यूनिवर्सिटी कैंपस में कार्यकर्ताओं ने गौरव वीर सोहल को कंधों पर उठाकर विजय जुलूस निकाला। वहीं, विपक्षी छात्र संगठनों के बीच मायूसी साफ दिखाई दी।
राजनीतिक मायने
विशेषज्ञों का कहना है कि इस जीत का असर आने वाले समय में पंजाब की राजनीति पर भी पड़ सकता है। छात्रसंघ चुनावों को अक्सर राज्य की राजनीति का आईना माना जाता है। एबीवीपी की जीत से भाजपा खेमे को भी राज्य की राजनीति में नई ऊर्जा मिल सकती है।