देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला लिया है। राज्य के 1983 राजस्व गांवों को अब नियमित पुलिस क्षेत्राधिकार में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम प्रदेश की कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा सुधार साबित होगा।
राज्य सरकार का यह निर्णय मा. उच्च न्यायालय के आदेशों और पूर्व मंत्रिमंडलीय निर्णयों के अनुरूप लिया गया है। इसका उद्देश्य स्पष्ट है—ग्रामीण एवं सीमांत क्षेत्रों में भी अब वही त्वरित पुलिस सेवा और कानून-व्यवस्था लागू होगी, जैसी शहरों में होती है।
🔹 ग्रामीण इलाकों में अब होगी सीधी पुलिस कार्रवाई
इस फैसले के बाद प्रदेश के दूरस्थ, सीमांत और पर्वतीय इलाकों में रहने वाले नागरिकों को अब किसी भी अपराध या विवाद की स्थिति में सीधे नियमित पुलिस व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
पहले जहां राजस्व पुलिस प्रणाली सीमित अधिकारों के तहत काम करती थी, अब वहां फुल फोर्स पुलिसिंग लागू होगी। इससे
- अपराधों पर शीघ्र नियंत्रण,
- त्वरित जांच व कार्रवाई, और
- न्याय की उपलब्धता में तेजी आएगी।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय से न केवल अपराध नियंत्रण में सहायता मिलेगी, बल्कि ग्रामीण समाज में विश्वास और सुरक्षा की भावना भी और गहरी होगी।
🔹 मुख्यमंत्री धामी का बयान: “जनता का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर कहा कि इससे प्रदेश की कानून व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा,
“यह कदम जनता की सुरक्षा और विश्वास को और मजबूती देगा। हम एक ऐसा सामाजिक वातावरण बनाना चाहते हैं जो सुरक्षित, पारदर्शी और न्यायपूर्ण हो।”
मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि पुलिस व्यवस्था को प्रभावी और जवाबदेह बनाना सरकार की प्राथमिकता है, और इस दिशा में यह निर्णय एक मील का पत्थर साबित होगा।
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🔹 ऐतिहासिक कदम, सुरक्षित भविष्य
राज्य सरकार का यह कदम केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि ‘गुड गवर्नेंस’ और ‘न्याय की पहुंच सब तक’ के सिद्धांत की सच्ची अभिव्यक्ति है। यह निर्णय उत्तराखंड के ग्रामीण जीवन में सुरक्षा और भरोसे की नई ऊर्जा लाएगा।