नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने इस बार दिवाली पर सरकारी उपक्रमों (CPSEs – Central Public Sector Enterprises) की ओर से उपहार वितरण पर पूर्ण रोक लगा दी है। सरकार ने यह निर्णय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सार्वजनिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को ध्यान में रखते हुए लिया है।
अब तक परंपरा रही है कि दिवाली जैसे त्योहारों पर CPSEs अपने कर्मचारियों, अधिकारियों और कभी-कभी बाहरी लोगों तक को उपहार स्वरूप मिठाइयाँ, ड्राई फ्रूट्स, सोने-चाँदी के सिक्के, इलेक्ट्रॉनिक गिफ्ट्स या अन्य महंगे तोहफे बांटते रहे हैं। लेकिन इस बार सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि सार्वजनिक धन का अपव्यय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सूत्रों के मुताबिक, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। यह भी माना जा रहा है कि गिफ्ट वितरण पर भारी-भरकम खर्च से न केवल सरकारी उपक्रमों का बोझ बढ़ता है बल्कि कई बार इसकी आड़ में भ्रष्टाचार और पक्षपात की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
बड़ा संकेत
सरकार का यह कदम केवल दिवाली गिफ्ट रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा संकेत है कि आने वाले समय में CPSEs और मंत्रालयों को अपने खर्चों में और भी मितव्ययी होना होगा। “विवेकपूर्ण संसाधन प्रबंधन” अब सरकारी कामकाज की नई प्राथमिकता बनने जा रही है।
असर क्या होगा?
- कर्मचारियों और अधिकारियों को इस बार सरकारी तोहफे नहीं मिलेंगे।
- भ्रष्टाचार या पक्षपात के रास्ते बंद होंगे।
- सरकारी उपक्रमों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
- आम जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि सरकार “सबका साथ-सबका विकास” के साथ-साथ “सबका संसाधन-सबका बचाव” पर भी काम कर रही है।