🛑 उत्तरकाशी, 22 अक्टूबर 2024
उत्तराखंड के हिमालयी आंचल में बसा विश्व प्रसिद्ध श्री गंगोत्री धाम आज अपनी वार्षिक शीतकालीन यात्रा पर निकल पड़ा। परंपरानुसार अन्नकूट पर्व के पावन अवसर पर बुधवार, 22 अक्तूबर (कार्तिक 6 गते) को प्रातः 11 बजकर 36 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
गंगोत्री धाम के कपाटबंदी समारोह में देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। इस पवित्र क्षण में मां गंगा की उत्सव मूर्ति के दर्शन कर सभी ने आशीर्वाद लिया। पूरा परिसर “हर हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयघोषों से गूंज उठा।
मां गंगा की डोली यात्रा का शुभ प्रस्थान
कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव मूर्ति को परंपरा अनुसार डोली में विराजमान कर मुखवा गांव के लिए रवाना किया गया। यह वही गांव है, जहां शीतकाल में मां गंगा की पूजा-अर्चना होती है।
तीर्थ पुरोहितों की अगुवाई में यह डोली यात्रा लोक वाद्य यंत्रों की धुनों, ढोल-दमाऊ और रंवाई नृत्य की झंकार के बीच आगे बढ़ी। यात्रा मार्ग में भक्तों ने फूल बरसाकर माता की विदाई की।
आज रात्रि में मां गंगा की डोली चंडी देवी मंदिर (मार्कण्डेय पुरी) में विश्राम करेगी, जबकि गुरुवार को भैयादूज पर्व के दिन सोमेश्वर देवता की अगवानी में यह यात्रा मुखवा (मुखीमठ) पहुंचेगी। यहां गंगा मंदिर में उत्सव प्रतिमा को शीतकाल के लिए विराजमान किया जाएगा।
इस बार रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे तीर्थयात्री
चारधाम यात्रा सत्र 2024 में गंगोत्री धाम में भक्तों की आस्था नई ऊंचाई पर रही। कपाटोद्घाटन से कपाटबंदी तक 7,57,010 तीर्थयात्रियों ने गंगोत्री धाम में दर्शन किए। प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय व्यापारियों के अनुसार यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा, जिसने उत्तरकाशी की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाया।
अब शीतकाल में मुखवा मंदिर में होंगे मां गंगा के दर्शन
कपाट बंद होने के बाद अगले छह महीनों तक मां गंगा की पूजा मुखवा गांव स्थित गंगा मंदिर में होगी। श्रद्धालु यहां पूरे शीतकाल के दौरान मां गंगा के दर्शन कर सकते हैं।
मुखवा गांव को गंगोत्री धाम का शीतकालीन प्रवास स्थल कहा जाता है। यहां हर वर्ष की तरह धार्मिक आयोजन, गंगा पूजन और विशेष आरती की परंपरा निभाई जाएगी।
यमुनोत्री धाम के कपाट कल होंगे बंद
गंगोत्री के साथ ही अब यमुनोत्री धाम मंदिर के कपाट भी 23 अक्टूबर 2025 को भैयादूज पर्व पर अपराह्न 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे।
कपाटबंदी के उपरांत मां यमुना की उत्सव मूर्ति को परंपरा अनुसार खरसाली गांव स्थित यमुना मंदिर में लाया जाएगा, जहां वह शीतकाल भर विराजमान रहेंगी। भक्तगण यहां देवी यमुना की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।
उत्तराखंड की परंपरा का प्रतीक: कपाटबंदी का आध्यात्मिक महत्व
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि हिमालय में सर्दियों की औपचारिक शुरुआत का संकेत भी है। जब बर्फबारी शुरू होती है और तापमान गिरने लगता है, तो देवी-देवताओं की डोलियां निचले गांवों में शीतकालीन निवास हेतु लाई जाती हैं।
यह परंपरा न केवल श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि हिमालय की कठोर जलवायु के प्रति मानव की गहरी समझ और अनुकूलन क्षमता को भी दर्शाती है।
