“21 जुलाई को हुआ कुछ ऐसा, जिसने भारतीय सियासत की धड़कनें तेज़ कर दीं।”
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने संसद से लेकर सत्ता के गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है। लेकिन असली बवाल उस ‘क्रोनोलॉजी’ को लेकर है, जिसे अब कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सार्वजनिक करते हुए सत्ता के भीतर चल रही गुप्त राजनीति की ओर इशारा किया है।

🔥 दो मीटिंग्स, दो चेहरे – BAC में क्या हुआ?
21 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे उपराष्ट्रपति धनखड़ ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक बुलाई। इसमें राज्यसभा के नेता जेपी नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी मौजूद थे। बैठक सामान्य रूप से चली और तय हुआ कि शाम 4:30 बजे दोबारा बैठक होगी।
लेकिन जैसे ही शाम की बैठक शुरू हुई, जेपी नड्डा और रिजिजू दोनों नदारद थे। न उन्होंने कोई सूचना दी, न ही कोई प्रतिनिधि भेजा। उपराष्ट्रपति visibly नाराज़ हुए और बैठक को अगले दिन यानी 22 जुलाई, दोपहर 1 बजे तक के लिए टाल दिया।
जयराम रमेश ने इस गैर-मौजूदगी को “साज़िश के संकेत” बताते हुए कहा कि 1 बजे से 4:30 बजे के बीच कुछ बहुत गंभीर हुआ।
🔥 7:15 बजे की क्लोज़ डोर मीटिंग: कौन-कौन था शामिल?
सिर्फ इतना ही नहीं। शाम 7:15 से 7:50 के बीच संसद भवन में एक गोपनीय बैठक हुई। इसमें सरकार के दूसरे, तीसरे और चौथे नंबर के केंद्रीय मंत्री शामिल हुए। ये मीटिंग उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ हुई – और सिर्फ 25 मिनट चली। इसके बाद इन मंत्रियों ने अलग से मीटिंग की।
करीब डेढ़ घंटे बाद, रात 9:30 के आसपास, उपराष्ट्रपति धनखड़ ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया। न प्रेस कॉन्फ्रेंस, न कोई स्पष्टीकरण, सिर्फ सन्नाटा।
🔥 राजनाथ सिंह के ऑफिस में हलचल और कोरे कागज़!
शाम होते-होते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दफ्तर के बाहर हलचल तेज़ हो गई। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, वहां कई दौर की बैठकों के साथ-साथ बीजेपी सांसदों से कोरे कागज़ पर हस्ताक्षर भी करवाए जा रहे थे।
यह कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं मानी जा रही। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि कुछ बहुत बड़ा तय किया जा रहा था — या फिर धनखड़ को हटाने या मना करने की आखिरी कोशिश हो रही थी?
🔥 इस्तीफे से पहले आखिरी दबाव?
उपराष्ट्रपति के रूप में धनखड़ हाल के महीनों में संसद की कार्यवाही में अधिक मुखर और स्वतन्त्र दिखाई दिए थे। कई मौकों पर उन्होंने सत्ता पक्ष को भी अप्रत्याशित झटके दिए। क्या ये सब उस “अंदरूनी नाराज़गी” की वजह बना?
🔥 कौन बनेगा अगला उपराष्ट्रपति?
सियासी गलियारों में दो नाम तैर रहे हैं:
- जेपी नड्डा – राज्यसभा सांसद, पूर्व बीजेपी अध्यक्ष, और मोदी-शाह के बेहद करीबी।
- नीतीश कुमार – अगर बीजेपी बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है, तो नीतीश को दिल्ली लाकर उपराष्ट्रपति बनाना एक मास्टरस्ट्रोक हो सकता है।
🔥 एक्स फैक्टर: चुप्पी क्यों?
अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय, बीजेपी या खुद धनखड़ की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह चुप्पी खुद में कई सवाल खड़े करती है।
क्या धनखड़ ने खुद इस्तीफा दिया? या उन्हें मजबूर किया गया?
BAC की बैठक से नड्डा-रिजिजू की गैरमौजूदगी और बाद में कोरे कागज़ पर दस्तखत – क्या यह एक प्री-प्लान्ड मूव था?
जवाब फिलहाल अंधेरे में हैं, लेकिन एक बात साफ़ है — 21 जुलाई की सियासत ने भारत के संवैधानिक पदों को लेकर एक गहरी चिंता और रहस्य को जन्म दे दिया है।
