जयपुर। राजस्थान की वीरभूमि ने एक बार फिर अपने इतिहास को गर्व से जीवित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। वरिष्ठ चिंतक और लेखक राजेन्द्र मोहन शर्मा की नई पुस्तक ‘रजवाड़ों के जांबाज़’ का लोकार्पण रविवार को जयपुर में हुआ। स्वरांजली संस्थान के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रनिष्ठ समारोह ने इतिहास के उन पन्नों को फिर से पलटने का आह्वान किया, जिन्हें वर्षों तक उपेक्षित या विकृत किया गया।
समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रख्यात साहित्यकार प्रदीप सैनी ने कहा, “राजस्थान की रेत में भक्ति की शक्ति है, और रक्त में राष्ट्रभक्ति की गरज। इस धरती के वीरों ने जब-जब देश पर संकट आया, अपनी तलवारें उठाकर इतिहास की धारा बदल दी। यह पुस्तक उन अनदेखे और अनसुने नायकों की अमर गाथा है।”
उन्होंने पुस्तक को “युवा पीढ़ी के लिए एक जागरण मंत्र” बताते हुए कहा कि इतिहास को अब वामपंथी चश्मे से नहीं, सत्य के दर्पण से देखा जाना चाहिए।
इतिहास के प्रसिद्ध समीक्षक डॉ. एम.एम. शर्मा ने भी बेबाक टिप्पणी करते हुए कहा, “वामपंथी इतिहासकारों ने मुगलों को महिमामंडित कर भारत के असली वीरों को हाशिए पर धकेल दिया। ‘रजवाड़ों के जांबाज़’ ने उन झूठी दीवारों पर प्रहार किया है।”
पुस्तक के लेखक राजेन्द्र मोहन शर्मा ने इस कृति को बलिदानी योद्धाओं को समर्पित एक श्रद्धांजलि बताते हुए कहा कि “भरतपुर के महाराजा सूरजमल से लेकर countless नायकों तक, हमारी नई पीढ़ी को यह जानने का अधिकार है कि किसने विदेशी हमलावरों से भारत की रक्षा की थी। यह किताब उस अधिकार की शुरुआत है।”
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वयोवृद्ध चिंतक पं. प्यारे मोहन शर्मा ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि “ऐसी राष्ट्रप्रेरक पुस्तकों को स्कूलों के पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी अपना गौरवशाली अतीत जान सके।”
इस गरिमामयी अवसर पर डॉ. आलोक व्यास, डॉ. धैर्य व्यास, प्रो. योगेन्द्र मोहन, डॉ. एन.एम. शर्मा, श्रीमती सरोज, श्रीमती रंजना, और तारा शर्मा सहित अनेक विद्वानों और साहित्यप्रेमियों ने विचार साझा किए।
कार्यक्रम का संचालन दिनेश शर्मा सुजानगढ़िया ने किया।